लेख
10-Jan-2026
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डोनाल्ड ट्रंप जब सत्ता में आए थे तो उन्होंने अमेरिकी जनता से यूक्रेन युद्ध रुकवाने का वादा किया था. लेकिन नया साल शुरू होते ही उनके कदम दुनिया में शांति के बजाय तनाव और टकराव को बढ़ाते नजर आ रहे हैं. यूक्रेन युद्ध अभी खत्म भी नहीं हुआ कि मिडिल ईस्ट में आग भड़क चुकी है. इस बीच अब अमेरिका-रूस के बीच सीधा टकराव वैश्विक चिंता का कारण बन गया है. सवाल उठने लगा है कि क्या ट्रंप दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल रहे हैं? आपको बता दें मादुरो को पकड़ने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप के हौसले बुलंद है। अब उन्होंने रूसी तेल टैंकरों को निशाने पर ले लिया है। अगर अमेरिका आगे और कार्रवाई करता है तो उसकी जद में चीन भी आ सकता है।वेनेजुएला के तेल के बाद अब अमेरिका की निगाह रूसी तेल पर है। अमेरिका ने पिछले साल रूस की रोसनेफ्ट और लुकोइल समेत कई तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया था। अब खबर आ रही है कि इन कंपनियों की विदेशी संपत्ति को जब्त करने की कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है। उधर, बुधवार को अमेरिका ने ब्रिटेन की मदद से उत्तरी अटलांटिक महासागर में रूसी झंडे वाले तेल टैंकर ‘मरीनेरा’ को जब्त कर लिया है. यह कार्रवाई अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सेना के संयुक्त ऑपरेशन में की गई. अमेरिकी दावा है कि यह टैंकर प्रतिबंधों का उल्लंघन कर अवैध रूप से वेनेजुएला का तेल ले जा रहा था. यह वही टैंकर है जिसका पुराना नाम ‘बेला-1’ था और जिस पर 2024 में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए थे. बाद में इसका नाम बदलकर मरीनेरा कर दिया गया. यह ऑपरेशन किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था. समंदर में तैरता टैंकर, उसके ऊपर मंडराता हेलीकॉप्टर और रस्सियों के सहारे उतरते अमेरिकी जवान. खास बात यह रही कि अमेरिका की यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई जब उसी इलाके में रूसी नौसेना के युद्धपोत और पनडुब्बियां भी मौजूद थीं. हालांकि जब अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने टैंकर पर कब्जा किया, उस समय आसपास कोई रूसी जहाज नहीं था. इस ऑपरेशन में ब्रिटेन ने अमेरिका का पूरा साथ दिया. रूस ने इस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. रूसी सीनेटर एंड्री क्लिशस ने इसे खुले समुद्र में घोर समुद्री डकैती करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून का सीधा उल्लंघन बताया. रूस ने 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी देश को दूसरे देश के विधिवत पंजीकृत जहाज के खिलाफ बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है. अब दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि रूस इसका जवाब किस तरह देता है. रूसी जहाज के जब्त करने के बाद अमेरिका और रूस के बीच सैन्य टकराव की आशंका भी बढ़ गई। रूस ने अपने टैंकरों की सुरक्षा की खातिर पनडुब्बियों की तैनाती की है। यहां तक की अपनी नौसेना भेजी है। अगर अमेरिका जब्ती की कार्रवाई को बार बार दोहराता है तो समुद्र रणभूमि में बदल सकते हैं, क्योंकि अमेरिका ने पहले ही प्रतिबंधों से रूस की आय काफी हद तक सीमित कर दी है। अब अगर शैडो फ्लीट को निशाना बनाया गया तो यह सैन्य टकराव की वजह बन सकता है। अमेरिका ने 24 घंटे के भीतर दूसरी बड़ी कार्रवाई करते हुए कैरिबियन सागर में ‘एम/टी सोफिया’ नामक एक और तेल टैंकर को जब्त किया, जो वेनेजुएला का तेल लेकर चीन की ओर जा रहा था. इससे साफ है कि ट्रंप प्रशासन तेल के कारोबार और उस पर नियंत्रण को लेकर बेहद आक्रामक नीति अपना रहा है ट्रंप ने न केवल रूस से पंगा लिया है, बल्कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को किडनैप कर सीधे तौर पर चीन के हितों पर चोट की है. वहीं, ईरान के मामले में ट्रंप के करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने बेहद खतरनाक बयान दिया है. ग्राहम ने खुली धमकी दी है कि यदि ईरान ने अपने देश में प्रदर्शनकारियों की हत्या नहीं रोकी, तो राष्ट्रपति ट्रंप वहां के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मारने का आदेश दे सकते हैं. अमेरिका की नजर अब ग्रीनलैंड को हड़पने पर है. इसके लिए उन्होंने यूरोपीय देशों और नाटो को दो-टूक कहा है कि अमेरिका के बिना नाटो का कोई अस्तित्व नहीं है. जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने वेनेजुएला पर अमेरिकी एक्शन की आलोचना की, तो ट्रंप ने सार्वजनिक मंच से उनका मजाक उड़ाकर राजनयिक मर्यादाओं को तार-तार कर दिया.ट्रंप प्रशासन अपने रक्षा बजट को 1 ट्रिलियन डॉलर से बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने की तैयारी में है. विशेषज्ञ इसे युद्ध की तैयारी के रूप में देख रहे हैं. वहीं, भारत के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. अमेरिका इस बात पर विचार कर रहा है कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है, तो उस पर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाया जाए. अमेरिका अभी तक रूस की दो-तिहाई तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लगा चुका है। इन कंपनियों के साथ व्यापार करने वाली अन्य कंपनियों पर भी द्वितीयक प्रतिबंध की धमकी दी है। इस कारण कई कंपनियां डर गई हैं और रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है। इस कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की आपूर्ति कम हो गई। इसका असर यह हुआ कि प्रतिबंध के बाद से दिसंबर तक तेल की कीमतों में प्रति बैरल 5 डॉलर का इजाफा हो चुका है। अगर अमेरिका लगातार रूसी टैंकरों को निशाना बनाता है तो आपूर्ति में और भी बाधा आएगी। नतीजा यह होगा कि तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।चीन रूसी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है। ट्रंप प्रशासन ने वैसे तो चीन के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया है। मगर वेनेजुएला मामले के बाद से उसके हौसले बुलंद है। इस बात की संभावना अधिक है कि प्रशांत और दक्षिण चीन सागर पर अमेरिका रूस से चीन जाने वाले तेल टैंकरों को निशाना बना सकता है, क्योंकि अमेरिकी की असली रणनीति लैटिन अमेरिका और यूरोप में चीन और रूस के प्रभुत्व को कम करके प्रशांत क्षेत्र में घेरने की है। डोनाल्ड ट्रंप की नीति पूरी दुनिया को स्तब्ध कर रही है इस का पटाक्षेप थर्ड वर्ल्ड वार बतौर भी हो सकता है। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं) ईएमएस / 10 जनवरी 26