वाशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिका से आ रहे संकेतों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन भारत को वेनेजुएला का कच्चा तेल खरीदने की अनुमति देने के लिए सैद्धांतिक रूप से तैयार हो गया है, लेकिन यह पूरी प्रक्रिया एक विशेष और नए अमेरिका-नियंत्रित ढांचे के अंतर्गत संचालित होगी। यह कूटनीतिक और आर्थिक कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिका लगातार भारत पर रूसी कच्चे तेल पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए दबाव बना रहा है। हाल ही में वेनेजुएला में हुए बड़े राजनीतिक बदलावों और अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद दक्षिण अमेरिकी ऊर्जा बाजार के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वाशिंगटन वेनेजुएला के तेल को वैश्विक बाजार में फिर से उतारने की योजना बना रहा है, जिसमें भारत एक महत्वपूर्ण खरीदार के रूप में उभरेगा। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस्टोफर राइट ने स्पष्ट किया कि वेनेजुएला के तेल का प्रवाह फिर से शुरू होगा, लेकिन इसकी बिक्री पूरी तरह अमेरिकी सरकार की निगरानी में होगी। इस नई व्यवस्था के तहत, तेल की बिक्री से होने वाली आय वाशिंगटन द्वारा नियंत्रित खातों में जमा की जाएगी। राइट ने दो टूक शब्दों में कहा कि वैश्विक खरीदारों के पास केवल दो विकल्प हैं—या तो वे अमेरिका के साथ मिलकर तेल का व्यापार करें या वेनेजुएला से तेल न खरीदें। अमेरिका इस नियंत्रण का उपयोग वेनेजुएला के पिछले शासन से जुड़ी अस्थिरता और आपराधिक गतिविधियों को जड़ से समाप्त करने के लिए एक लेवरेज के रूप में कर रहा है। यह महत्वपूर्ण घोषणा 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी और उन्हें अमेरिकी बलों द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद आई है। मादुरो पर ड्रग्स और हथियारों की तस्करी के गंभीर आरोप हैं। इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने घोषणा की थी कि अमेरिका अब वेनेजुएला के तेल क्षेत्र का प्रबंधन संभालेगा और अमेरिकी कंपनियां वहां अरबों डॉलर का निवेश कर उत्पादन में वृद्धि करेंगी। काराकास और वाशिंगटन के बीच हुए ताज़ा समझौते के तहत, शुरुआत में लगभग 30-50 मिलियन बैरल कच्चा तेल, जिसकी कीमत करीब 2 अरब डॉलर है, वैश्विक बाजार में भेजा जाएगा। वेनेजुएला के पास वर्तमान में भंडारण टैंकों और जहाजों में लाखों बैरल तेल फंसा हुआ है, जिसे अब अमेरिकी नियंत्रण में बेचा जाएगा। भारत के परिप्रेक्ष्य में यह समझौता अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक है। भारतीय रिफाइनरियां तकनीकी रूप से वेनेजुएला के भारी कच्चे तेल को संसाधित करने में अत्यधिक कुशल मानी जाती हैं। वर्ष 2019 से पहले भारत वेनेजुएला का एक प्रमुख खरीदार था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण यह व्यापार रुक गया था। अब इस नए ढांचे के तहत भारत को रूसी तेल के विकल्प के रूप में एक सस्ता स्रोत मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी बड़ी भारतीय रिफाइनरी कंपनियां इस दिशा में अमेरिकी अधिकारियों के साथ पहले से ही बातचीत कर रही हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/10जनवरी2026 -----------------------------------