राजनीति: युवा कार्यकर्ताओं का जोश दिखा न एकता, संगठनात्मक कमजारी फिर हुई उजागर छिंदवाड़ा (ईएमएस)। जहरीले पानी से इंदौर में हुई मौतों और उसके बाद प्रदेश सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक पत्रकार के सवाल में कहे गए अपशब्द के विरोध में कांग्रेस का पूरे प्रदेश में भाजपा के सांसद विधायकों के निवास पर घंटा बजाकर विरोध के निर्देश दिए। कांग्रेस के लिए बड़ा मुद्दा था। प्रदेश में कई स्थानों पर प्रभावी विरोध प्रदर्शन हुआ। छिंदवाड़ा में भी हुआ लेकिन पूरी तरह असफल रहा। अंबेडकर तिरोह पर सांसद के निवास तक बढऩे आए कांग्रेसी वहां से एक इंच आगे नहीं बढ़ सके। पुलिस की कड़ी निगरानी और बेरिकेडिंग के कारण कांग्रेसी सहमें और डरे से दिखे। उससे ज्यादा संख्या में तो भाजपाई खड़े दिखे। लोगों को उम्मीद थी कि कांग्रेसियों का यह प्रदर्शन खासा जोशीला रहेगा लेकिन जोश कहीं नजर नहीं आया। भाजपा के युवा नेता उनसे ज्यादा नारेबाजी करते दिखे। कांग्रेस की तरफ से विरोध के लिए आए नेता कार्यकर्ताओं की संख्या अंगुलियों पर गिनने लायक ही थी। उनके लगाए नारे सौ कदम दूरी तक भी नहीं सुनाई दिए। कांग्रेस के जिला और शहर कांग्रेस के मुख्य पदाधिकारियों और पार्षदों जैसे कुछ जाने पहचाने चेहरों को छोड़ दें तो बड़े नेताओं की मौजूदगी में खूब नारेबाजी और जोश दिखाने वाले युवा नदारद रहे। जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन तय हुआ तो शहर के कांग्रस नेता कार्यकर्ता तो उसमें दिखते। जिला मुख्यालय मे ही कांग्रेस के 15 से ज्यादा पार्षद हैं। शहर कांग्रेस के पदाधिकारी और नेता अपने साथ पांच-पांच कार्यकर्ता भी लाते तो अच्छी खासी उपस्थिति इस आंदेालन मे कांग्रेस की दिख जाती। शहर में संगठन की क्या स्थिति है इससे यह भी पता चल गया। ध्यान रहे लोकसभा चुनाव में मिले झटके के बाद जिले में कांग्रेस फिर से पहले की तरह जिंदा होने की कोशिश कर रही है। जनहित के मुद्दे हो या फिर सरकार का विरोध सडक़ पर जोश और उर्जा के साथ नेता कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ही पार्टी का पुराना रुतबा वापस ला सकती है लेकिन ऐसा कुछ दिख नहीं रहा। इस आंदोलन को सत्ताधारी दल के मंत्रियों और सरकारी की व्यवस्थाओं के खिलाफ जनाका्रेश का प्रतीक बनना था लेकिन न तो जोश दिख न उर्जा जिसकी अपेक्षा विपक्ष भी कर रहा था लेकिन कांग्रेस का घंटा बजाओ आंदोलन सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह गया। चौराहें पर चर्चा में कांग्रेस के इस घंटा बजाओ प्रदर्शन को पप्पू प्रदर्शन का नाम लोग दे रहे हैं। नगर और जिला संगठन के पदाधिकारी इस मामले में पूछने पर अब बगले झांक रहे हैं और कुुछ भी कहने से कतरा रहे हैं। कांग्रेस के लिए केवल औपचारिक रहे इस आंदोलन के बाद यह फिर साफ दिखा कि कांग्रेस नेतृत्व, संगठन और कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल की कमी से अभी भी जूझ रही है। पार्टी के ये हाल उसकी जमीनी कमजोरी का सर्वजनिक प्रदर्शन बन रहे हैं ये संगठन के आला पदों पर बैठे जिले के पदाधिकारियों को भी कुछ संदेश दे रहे हैं। कार्यकर्ताओं की घटती संख्या कांग्रेस की जिले में मौजूदगी पर भी सवाल उठा रही है। इस बारे में जिला संगठन और यहां का जिम्मा संभाल रहे राष्ट्रीय नेताओं और नेतृत्व को समझना होगा। ईएमएस/मोहने/ 10 जनवरी 2026