-जयराम ने सीआइईए की अध्ययन रिपोर्ट का दिया हवाला नई दिल्ली,(ईएमएस)। वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या को लेकर कांग्रेस पार्टी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और कहा, कि सरकार की नीतियाँ और योजनाएँ पूरी तरह से विफल हो चुकी हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) को लेकर अपने एक बयान में कहा, कि यह अब नोशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (कागजी प्रोग्राम) बनकर रह गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम ने रविवार को जारी बयान में कहा, कि सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) द्वारा हाल ही में किए गए अध्ययन ने इस बात की पुष्टि हुई है, कि वायु गुणवत्ता अब पूरे देश के लिए एक संरचनात्मक संकट बन चुकी है। उन्होंने कहा, यह लंबे समय से भारत के लिए सबसे खुला रहस्य है, कि देश के अधिकांश हिस्सों में वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन चुका है, और सरकार की ओर से इस पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए गए हैं। क्या कहती है सीआरईए की रिपोर्ट सीआरईए द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार, भारत के लगभग 44 प्रतिशत शहरों में वायु प्रदूषण की समस्या बेहद गंभीर हो गई है। इन शहरों में पांच वर्षों से अधिक समय तक हवा में पीएम 2.5 का स्तर राष्ट्रीय मानकों से ऊपर बना हुआ है। इस अध्ययन में कुल 4,041 नगरों में से 1,787 शहरों को प्रदूषण की गंभीर चपेट में पाया गया है। गहन समीक्षा और सुधार की आवश्यकता कांग्रेस महासचिव जयराम ने कहा, कि एनसीएपी का नाम भले ही नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम रखा गया हो, लेकिन यह एक कागजी योजना बनकर रह गई है। अब इसकी गहन समीक्षा और सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से यह भी कहा कि प्रदूषण को रोकने के लिए आवश्यक कदमों की सख्त आवश्यकता है। प्रदूषण रोकने की मांग कांग्रेस पार्टी ने वायु प्रदूषण को लेकर सरकार से कई महत्वपूर्ण सुधार की मांग की है। जयराम रमेश ने कहा कि एनसीएपी के लिए आवंटित फंड में भारी वृद्धि की आवश्यकता है। उन्होंने प्रस्तावित किया कि एनसीएपी का बजट 25,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाया जाए और इसे देश के सबसे प्रदूषित 1,000 शहरों और कस्बों में लागू किया जाए। इसके अलावा, जयराम रमेश ने एनसीएपी को कानूनी आधार देने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यह योजना अपनी प्राथमिकताएँ मुख्य प्रदूषण स्रोतों पर केंद्रित करे, विशेष रूप से कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के प्रदूषण मानकों को कड़ा किया जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सभी बिजली संयंत्रों में फ्लू गैस डी-सलफराइजर (एफजीडी) 2026 तक अनिवार्य रूप से स्थापित किए जाएं। कांग्रेस सांसद जयराम ने यह भी कहा, कि सरकार ने संसद में दो बार प्रदूषण के स्वास्थ्य पर प्रभाव को कमतर दिखाने की कोशिश की है और सरकार के इन प्रयासों को लेकर कांग्रेस ने इसे अक्षमता और लापरवाही का परिणाम करार दिया है। हिदायत/ईएमएस 11जनवरी26