अंतर्राष्ट्रीय
11-Jan-2026
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तेहरान (ईएमएस)। ठीक 15 साल पहले, 9 जनवरी 2011 को ईरान के विमानन इतिहास में एक ऐसी दुखद घटना घटी थी, जिसने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। तेहरान से उर्मिया जा रही ईरान एयर की फ्लाइट 277 उस दिन एक भयावह हवाई हादसे का शिकार हो गई थी। खराब मौसम, तकनीकी चुनौतियां और आसमान में बनी जानलेवा परिस्थितियों के कारण यह सफर अपनी मंजिल तक पहुंचने से पहले ही मौत के तांडव में बदल गया। आज इस हादसे की 15वीं बरसी पर ईरान उन 78 लोगों को याद कर रहा है, जिन्होंने उस काली शाम को अपनी जान गंवाई थी। घटना वाले दिन तेहरान के मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर कुदरत का मिजाज काफी बिगड़ा हुआ था। इसी वजह से फ्लाइट ने अपने निर्धारित समय से लगभग दो घंटे की देरी से शाम 6 बजकर 15 मिनट पर उड़ान भरी। यात्रियों को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि मौसम की यह अनिश्चितता उनके लिए काल बनकर आ रही है। जिस बोइंग 727 विमान का उपयोग इस यात्रा के लिए किया जा रहा था, वह करीब 35 साल पुराना था। इस विमान का इतिहास भी काफी संघर्षपूर्ण रहा था; यह सालों तक इराक में जब्त रहने के बाद कबाड़ की स्थिति में पड़ा रहा था और बाद में मरम्मत के बाद दोबारा सेवा में लाया गया था। विमान की कमान एक अत्यंत अनुभवी पायलट के हाथों में थी, लेकिन उर्मिया एयरपोर्ट के पास पहुंचते ही हालात बेकाबू हो गए। भारी बर्फबारी और बेहद कम विजिबिलिटी के कारण रनवे नजर नहीं आ रहा था। कई असफल प्रयासों के बाद जब पायलट ने विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाने का फैसला किया, तो विमान एक खतरनाक सीवियर आइसिंग जोन में फंस गया। अत्यधिक ठंड के कारण विमान के पंखों और इंजनों पर बर्फ की परतें जमने लगीं, जिससे इंजन की शक्ति कम होने लगी और एयरफ्लो बिगड़ गया। क्रू ने इंजनों को फिर से चालू करने की भरसक कोशिश की, लेकिन विमान असंतुलित होकर उर्मिया एयरपोर्ट से महज 15 किलोमीटर दूर जमीन से जा टकराया। हादसा इतना भीषण था कि विमान के कई टुकड़े हो गए। इस विमान में सवार कुल 105 लोगों में से 78 की मौके पर ही मौत हो गई, जिसमें चालक दल के सभी सदस्य शामिल थे। चमत्कारिक रूप से 27 यात्री इस मलबे से जीवित निकलने में सफल रहे, हालांकि वे गंभीर रूप से घायल थे। बाद की जांच रिपोर्टों में यह स्पष्ट हुआ कि इंजनों पर बर्फ का जमना और उस स्थिति में इंजन प्रबंधन की विफलता ही इस विनाशकारी दुर्घटना का मुख्य कारण बनी थी। आज 15 साल बाद भी यह हादसा पुराने विमानों के रखरखाव और खराब मौसम में उड़ान के जोखिमों को लेकर एक सबक बना हुआ है। वीरेंद्र/ईएमएस 11 जनवरी 2026