नई दिल्ली (ईएमएस)। सर्दियों में गर्भावस्था के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल और शारीरिक बदलावों के कारण प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य से कमजोर हो जाती है। ऐसे में ठंड लगना, सर्दी-जुकाम, जोड़ों में दर्द और जल्दी थक जाना आम समस्या बन सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर सही दिनचर्या, संतुलित आहार और सावधानी बरती जाए, तो सर्दियों में भी गर्भवती महिला खुद को और अपने होने वाले शिशु को सुरक्षित रख सकती है। आयुर्वेद के अनुसार सर्दियों में वात दोष बढ़ जाता है, जिससे शरीर में रूखापन, दर्द और ठंड का असर अधिक महसूस होता है। गर्भवती महिला यदि अपने शरीर को गर्म और आरामदायक रखती है, तो वात संतुलित रहता है और शरीर सहज महसूस करता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी ठंड के मौसम में शरीर को सामान्य तापमान बनाए रखने के लिए अधिक ऊर्जा खर्च करनी पड़ती है, जिससे थकान बढ़ सकती है। इसलिए इस मौसम में ऊनी, ढीले और आरामदायक कपड़े पहनना जरूरी माना जाता है। सिर और पैरों को ढककर रखने से शरीर की गर्मी सुरक्षित रहती है। इसके साथ ही दिन में कुछ समय धूप में बैठना विटामिन डी पाने का आसान तरीका है, जो मां की हड्डियों को मजबूत रखने और गर्भ में पल रहे बच्चे के विकास के लिए आवश्यक है। सर्दियों में प्यास कम लगने के कारण कई महिलाएं पानी कम पीने लगती हैं, जबकि शरीर की जरूरत उतनी ही रहती है। आयुर्वेद गुनगुना पानी पीने की सलाह देता है, जिससे पाचन बेहतर रहता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं। आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से कब्ज, थकान और यूरिन इन्फेक्शन जैसी समस्याओं का खतरा कम होता है, जो गर्भावस्था में आम हैं। गुनगुना पानी, सूप और हल्की हर्बल चाय शरीर को अंदर से गर्म रखने के साथ रक्त संचार को भी बेहतर बनाती हैं, जिससे बच्चे तक पोषण सही तरीके से पहुंचता है। अचानक ठंडे और गर्म वातावरण में जाना गर्भवती महिला के लिए नुकसानदायक हो सकता है। आयुर्वेद इसे शरीर के प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ने वाला मानता है, जबकि विज्ञान के अनुसार अचानक तापमान बदलने से शरीर को ढलने का समय नहीं मिलता और सर्दी-बुखार का खतरा बढ़ जाता है। बाहर निकलते समय कुछ पल ठहरकर धीरे-धीरे वातावरण के अनुसार खुद को ढालना फायदेमंद होता है। खानपान सर्दियों में गर्भवती महिला की सबसे बड़ी ताकत होता है। आयुर्वेद पौष्टिक और हल्का गर्म भोजन लेने की सलाह देता है। गाजर, चुकंदर, पालक और शकरकंद जैसी मौसमी सब्जियां खून बढ़ाने और शिशु के विकास में सहायक होती हैं। सुदामा/ईएमएस 11 जनवरी 2026