-अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी कर रहे कड़ा विरोध वाशिंगटन,(ईएमएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को अमेरिकी नियंत्रण में लाने के लिए सैन्य विकल्प पर विचार करना शुरू कर दिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति ने स्पेशल फोर्स कमांडरों को ग्रीनलैंड पर संभावित सैन्य कार्रवाई या कब्जे की योजना तैयार करने का निर्देश दिया है। हालांकि, अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी राष्ट्रपति के इस विचार का कड़ा विरोध कर रहे हैं और इसे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन मान रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, ट्रंप के करीबी सलाहकार, विशेष रूप से स्टीफन मिलर, इस योजना को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सलाहकारों का तर्क है कि जिस तरह वेनेजुएला में राजनीतिक हस्तक्षेप सफल रहा, उसी तर्ज पर अब ग्रीनलैंड की ओर रुख करना चाहिए। इसके पीछे मुख्य चिंता यह है कि यदि अमेरिका ने देरी की, तो रूस या चीन इस रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र पर अपनी पकड़ मजबूत कर सकते हैं। आंतरिक राजनीति और अर्थव्यवस्था से ध्यान हटाने की कोशिश ब्रिटिश राजनयिकों का मानना है कि ट्रंप के इस कदम के पीछे घरेलू राजनीति एक बड़ा कारण हो सकती है। अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों को देखते हुए और गिरती अर्थव्यवस्था पर उठ रहे सवालों के बीच, राष्ट्रपति मतदाताओं का ध्यान राष्ट्रीय सुरक्षा के किसी बड़े मुद्दे की ओर मोड़ना चाहते हैं। नाटो गठबंधन पर मंडराता खतरा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ग्रीनलैंड के खिलाफ कोई भी सैन्य या जबरन कदम उठाता है, तो इसका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। यह फैसला न केवल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के साथ संबंधों में तनाव पैदा करेगा, बल्कि उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के अस्तित्व के लिए भी खतरा बन सकता है। कई राजनयिक दस्तावेजों में संकेत दिया गया है कि इस तरह का एकतरफा फैसला नाटो को भीतर से तोड़ सकता है। सेना और प्रशासन के बीच टकराव खबरों के मुताबिक, ट्रंप ने जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड को योजना बनाने को कहा है, लेकिन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी कांग्रेस और अंतरराष्ट्रीय समुदाय कभी भी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेंगे। सैन्य अधिकारी फिलहाल राष्ट्रपति का ध्यान इस मुद्दे से भटकाने के लिए उन्हें रूस के घोस्ट जहाजों को रोकने या ईरान के खिलाफ सीमित कार्रवाई जैसे अन्य विकल्पों का सुझाव दे रहे हैं। डेनमार्क और ग्रीनलैंड का रुख इन सबके बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने फिर दोहराया है कि अगर सौदे के जरिए ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं मिला, तो सख्त रास्ता अपनाना होगा। वहीं दूसरी ओर, ग्रीनलैंड के सभी राजनीतिक दलों ने एक संयुक्त बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि वे न तो अमेरिका का हिस्सा बनना चाहते हैं और न ही किसी बाहरी दबाव में रहना चाहते हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला वहां की जनता ही करेगी। वीरेंद्र/ईएमएस/11जनवरी2026