अंतर्राष्ट्रीय
11-Jan-2026


तेहरान,(ईएमएस)। ईरान में पिछले दो हफ्तों से जारी विरोध प्रदर्शन अब एक भीषण राष्ट्रीय संकट का रूप ले चुके हैं। राजधानी तेहरान समेत देश के 100 से अधिक शहरों में हालात बेकाबू हैं। सरकार ने स्वीकार किया है कि प्रदर्शन थम नहीं रहे हैं, जिसके जवाब में सुरक्षाबलों की कार्रवाई और सख्त कर दी गई है। देश में इंटरनेट और संचार सेवाएं पूरी तरह ठप हैं, जिससे ईरान दुनिया से कट गया है। अपुष्ट खबरों के अनुसार, अस्पतालों में शवों के ढेर लगे हैं और हिंसा की आग मस्जिदों तक पहुंच गई है। हिंसा और बर्बादी का मंजर तेहरान के मेयर के अनुसार, प्रदर्शनों के दौरान भारी सार्वजनिक संपत्ति का नुकसान हुआ है। राजधानी में 25 मस्जिदों को आग के हवाले कर दिया गया है, जबकि 26 बैंक लूट लिए गए हैं। इसके अलावा दर्जनों सरकारी इमारतें, फायर ब्रिगेड की गाड़ियां, बसें और एंबुलेंस क्षतिग्रस्त हुई हैं। सुरक्षाबलों के मुख्यालयों और चौकियों पर भी लगातार हमले हो रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में तेहरान की सड़कों पर रात के वक्त भारी भीड़ और आगजनी देखी जा सकती है, जहां लोग सत्ता विरोधी नारे लगा रहे हैं। सख्त कानून और मौत की सजा की चेतावनी ईरान के अटॉर्नी जनरल ने प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि विरोध में शामिल किसी भी व्यक्ति को ईश्वर का दुश्मन माना जाएगा। ईरानी कानून के तहत इस अपराध के लिए फांसी, अंग-भंग या आजीवन निर्वासन जैसी क्रूर सजाओं का प्रावधान है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने इस हिंसा के लिए बाहरी तत्वों और आतंकियों को जिम्मेदार ठहराया है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि अब तक 200 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और हजारों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि सरकारी आंकड़े मौतों की संख्या कम बता रहे हैं। खामेनेई का आरोप और अंतरराष्ट्रीय तनाव सुप्रीम लीडर अयातोल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका का हाथ बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने और तेल संसाधनों पर कब्जा करने के लिए किया जा रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका की सैन्य हलचल बढ़ने की खबरें भी गर्म हैं। रिटायर्ड सैन्य अधिकारियों ने दावा किया है कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी जमावड़ा किसी बड़े सैन्य टकराव का संकेत हो सकता है। तख्तापलट की अपील निर्वासन में रह रहे पूर्व शाह के बेटे रेजा पहलवी ने ईरानी जनता से सत्ता को उखाड़ फेंकने और आर्थिक हड़ताल करने की अपील की है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से प्रदर्शनकारियों का साथ देने को कहा है। फिलहाल, ईरान एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहां एक तरफ जनता का आक्रोश है और दूसरी तरफ सरकार का दमनकारी रुख, जिसने पूरे क्षेत्र में युद्ध की आहट पैदा कर दी है। वीरेंद्र/ईएमएस/11जनवरी2026