अंतर्राष्ट्रीय
11-Jan-2026


नूक,(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लेने की मांग को लेकर वैश्विक राजनीति में उबाल आ गया है। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन और वहां की सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने एक स्वर में ट्रंप के इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। सभी ने एकजुटता के साथ कहा कि मिस्टर ट्रंप इस बात का ध्यान रखें कि हम अमेरिकी नहीं, ग्रीनलैंडर हैं। जारी एक ऐतिहासिक संयुक्त बयान में प्रधानमंत्री नीलसन और चार अन्य शीर्ष नेताओं ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहां के निवासी ही तय करेंगे। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा, हम अमेरिकी नहीं बनना चाहते, और न ही डेनिश रहना चाहते हैं; हम केवल ग्रीनलैंडर हैं। इस साझा बयान पर पेले ब्रोबर्ग, मुते बी. एगेडे, अलेका हामंड और अक्कालु सी. जेरिमियासेन जैसे प्रमुख नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं, जो द्वीप की अटूट एकता को दर्शाता है।विवाद तब और गहरा गया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने अपनी मांग दोहराते हुए चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे ग्रीनलैंड को आसान तरीके यानी समझौते से हासिल करना चाहते हैं। ट्रंप ने यह भी जोड़ दिया कि यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वे कठोर तरीके (हार्ड वे) का इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेंगे। ट्रंप का तर्क है कि यदि अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया, तो रूस या चीन इस रणनीतिक क्षेत्र पर कब्जा कर सकते हैं, जो अमेरिकी सुरक्षा के लिए खतरा होगा। हालांकि ट्रंप ने कठोर तरीके की स्पष्ट व्याख्या नहीं की, लेकिन व्हाइट हाउस के सूत्रों के अनुसार, अमेरिका सैन्य विकल्प सहित कई कड़े कदमों पर विचार कर रहा है। ग्रीनलैंड वर्तमान में डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है और नाटो का हिस्सा होने के नाते इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी डेनमार्क की है। करीब 57,000 की आबादी वाला यह दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप अपनी सुरक्षा के लिए डेनमार्क पर निर्भर है क्योंकि इसकी अपनी कोई सेना नहीं है। ग्रीनलैंड के नेताओं ने अमेरिकी रुख की कड़े शब्दों में आलोचना करते हुए कहा कि उनके देश के प्रति दिखाया जा रहा तिरस्कार अब बंद होना चाहिए। उन्होंने दोहराया कि कोई भी बाहरी देश उनके भविष्य का फैसला नहीं कर सकता और वे अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत दबाव मुक्त होकर अपनी दिशा तय करेंगे। इस बीच, कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज है। वॉशिंगटन में अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के अधिकारियों के बीच बैठकें शुरू हो चुकी हैं। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने भी इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने जबरदस्ती कब्जा करने की कोशिश की, तो यह नाटो गठबंधन के अंत की शुरुआत होगी। आने वाले हफ्तों में होने वाली बातचीत यह तय करेगी कि यह विवाद कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ता है या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय टकराव का रूप लेता है। वीरेंद्र/ईएमएस/11जनवरी2026