अयोध्या,(ईएमएस)। अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के प्रथम तल पर स्थापित होने वाले विग्रहों के सामूहिक स्वरूप को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि अब राम दरबार के स्थान पर इसे राम परिवार के नाम से जाना जाएगा। यह निर्णय भारतीय संस्कृति की जड़ों, भाषाई शुद्धता और सनातन परंपराओं के सम्मान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। ट्रस्ट के अनुसार, दरबार शब्द की उत्पत्ति विदेशी मूल की है, जबकि राम मंदिर की संपूर्ण परिकल्पना और ढांचा पूर्णतः भारतीय लोक परंपराओं और सनातन मूल्यों पर आधारित है। इस नाम परिवर्तन के पीछे मुख्य उद्देश्य भगवान श्रीराम को एक शासक या राजसी औपचारिक स्वरूप के बजाय एक आदर्श पारिवारिक केंद्र के रूप में प्रस्तुत करना है। ट्रस्ट के पास इस नाम को बदलने के कई सुझाव आए थे, जिन पर प्रख्यात संतों और विद्वानों से विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। राम परिवार नाम न केवल भगवान राम, माता सीता, तीनों भाइयों—लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न—और परम भक्त हनुमान के बीच के अटूट और भावनात्मक संबंधों को दर्शाता है, बल्कि यह आम जनमानस के हृदय से भी सीधा जुड़ाव महसूस कराता है। प्रथम तल पर स्थापित किए जाने वाले इस समूह में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के साथ उनके पूरे परिवार की मूर्तियाँ विराजमान होंगी। संत समाज ने भी इस निर्णय की सराहना करते हुए कहा है कि राम परिवार शब्द में जो आत्मीयता और लोकनायक का भाव है, वह किसी भी शासकीय या औपचारिक शब्द में नहीं मिल सकता। यह बदलाव भविष्य की पीढ़ियों को रामराज्य की उस संकल्पना से जोड़ेगा जहाँ परिवार और समाज के बीच समरसता का अटूट बंधन था। वीरेंद्र/ईएमएस/11जनवरी2026