नई दिल्ली(ईएमएस)। भारत और अमेरिका के बीच गहराते रणनीतिक संबंधों के बीच अमेरिका के नवनियुक्त राजदूत सर्जियो गोर नई दिल्ली पहुंच गए। वे यहाँ आधिकारिक तौर पर अपना कार्यभार संभालने आए हैं, जिसे वाशिंगटन और नई दिल्ली दोनों ही राजधानियों में एक अत्यंत महत्वपूर्ण नियुक्ति माना जा रहा है। भारत में उतरने के तुरंत बाद सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर अपनी खुशी साझा करते हुए कहा कि भारत वापस आना उनके लिए सुखद अनुभव है और दोनों देशों के साझा भविष्य में अद्भुत संभावनाएं मौजूद हैं। उनका यह संदेश सकारात्मक कूटनीति और सहयोग की दिशा में एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। 38 वर्षीय सर्जियो गोर हाल के दशकों में भारत में नियुक्त होने वाले सबसे युवा अमेरिकी राजदूतों में से एक हैं। मूल रूप से ताशकंद में जन्मे गोर ने अमेरिका में अपनी शिक्षा पूरी की और वे अमेरिकी प्रशासन के अत्यंत भरोसेमंद अधिकारियों में गिने जाते हैं। वे व्हाइट हाउस के प्रेसिडेंशियल पर्सनल ऑफिस के डायरेक्टर के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जहाँ उन्होंने महत्वपूर्ण नियुक्तियों में निर्णायक भूमिका निभाई थी। नवंबर 2025 में सीनेट की मंजूरी मिलने के बाद उन्हें न केवल भारत का राजदूत बनाया गया है, बल्कि दक्षिण और मध्य एशिया के लिए विशेष दूत की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई है। यह अतिरिक्त प्रभार स्पष्ट करता है कि अमेरिका इस पूरे क्षेत्र में भारत की केंद्रीय भूमिका को कितनी गंभीरता से ले रहा है। सर्जियो गोर की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और अमेरिका के संबंध रक्षा, उच्च तकनीक और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मोर्चों पर नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं। हालांकि, व्यापारिक शुल्कों (टैरिफ) और बाजार पहुंच जैसे कुछ जटिल मुद्दे भी हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच समय-समय पर मतभेद उभरते रहे हैं। अपनी नियुक्ति से पूर्व हुई सुनवाई के दौरान गोर ने भारत को अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण साझेदार करार दिया था। उन्होंने स्पष्ट किया था कि उनका मुख्य उद्देश्य व्यापारिक असंतुलन जैसी चुनौतियों को सुलझाना और आपसी सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करना होगा। आने वाले दिनों में सर्जियो गोर की भारतीय नेताओं और वरिष्ठ राजनयिकों के साथ होने वाली शुरुआती बैठकें काफी महत्वपूर्ण होंगी। इन मुलाकातों से न केवल व्यापार और सुरक्षा के क्षेत्र में होने वाली प्रगति का रोडमैप तैयार होगा, बल्कि यह भी तय होगा कि दोनों महाशक्तियां वैश्विक चुनौतियों का सामना मिलकर कैसे करेंगी। दिल्ली के राजनयिक गलियारों में उनकी नियुक्ति को एक नई ऊर्जा और युवा दृष्टिकोण के रूप में देखा जा रहा है, जो दोनों देशों के भविष्य की दिशा तय करने में सहायक सिद्ध होगा। वीरेंद्र/ईएमएस/11जनवरी2026