इन्दौर (ईएमएस) अपर सत्र न्यायाधीश सोनल पटेल की कोर्ट में इन्दौर पुलिस के उजागर हुए एक हैरतअंगेज और अजीबोगरीब कारनामे के बाद कोर्ट ने पुलिस को फटकार लगाते तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है। मामला इन्दौर पुलिस द्वारा एक निर्दोष व्यक्ति को केवल उसके नाम और उसके पिता के नाम के आधार पर ही दोषी बताते हुए कोर्ट में पेश करने का है। इन्दौर पुलिस द्वारा पता नहीं किस कारण से इतनी भंयकर लापरवाही के इस कारनामे को अंजाम दिया गया यह भी जांच का विषय है। मामला परदेशीपुरा थाने में दर्ज हत्या के प्रयास के प्रकरण का है जिसमें रोहित पिता विजय यादव आरोपी है। उसके कोर्ट में पेश नहीं होने पर कोर्ट ने उसका गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। इसके पालन में परदेशीपुरा पुलिस ने रोहित यादव को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया था। पेशी दौरान गिरफ्तार कर पेश किए रोहित यादव की ओर से पैरवी करते अभिभाषक नवाजिश खान ने कोर्ट को बताया कि जिस रोहित यादव को गिरफ्तार कर पेश करने को कोर्ट ने कहा था, वह अन्य व्यक्ति है। और जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर कोर्ट के समक्ष पेश किया गया है वह दूसरा है। इसके लिए उन्होंने रोहित का आधार कार्ड पेश किया था। कोर्ट ने रोहित यादव की गिरफ्तारी के समय का रिकॉर्ड देखा तो पाया कि आरोपी रोहित यादव की जन्म तारीख 19 अगस्त 2002 है, उसके दाहिने हाथ के पंजे पर ओम गुदा है और उसकी छाती पर तिल है। जबकि, जिसे पेश किया गया, उसके आधार कार्ड में जन्म तारीख 19 जनवरी 1990 दर्ज है। उसके हाथ पर अंग्रेजी में आर लिखा है और छाती पर तिल भी नहीं है। शारीरिक बनावट भी गिरफ्तारी रिकॉर्ड से अलग होने पर कोर्ट ने यह मानते हुए कि जिसे पेश किया गया है, वह अन्य व्यक्ति है और आरोपी कोई और है। जिसके बाद कोर्ट ने अपने दिए आदेश में दर्ज किया कि पुलिस ने केवल नाम और पिता का नाम एक होने पर गलत व्यक्ति को गिरफ्तार कर पेश कर दिया। कोर्ट ने आदेश देते कहा कि निर्दोष होने पर उसे न्यायिक हिरासत में नहीं भेजा जा सकता। वहीं मामले में थाना प्रभारी परदेशीपुरा से तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा है कि बगैर पड़ताल के किसी अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार कर कोर्ट में कैसे पेश किया गया। मामले में अगली सुनवाई 12 फरवरी नियत की।