ईरान-अमेरिका तनाव का असर: शेयर बाजार से लेकर सोना-चांदी तक नई दिल्ली (ईएमएस)। मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात तेजी से बिगड़ते दिख रहे हैं। ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के तेज होने और अमेरिका की संभावित सैन्य कार्रवाई की चर्चाओं ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव न केवल कूटनीतिक स्तर पर हलचल मचा रहा है, बल्कि इसका सीधा असर शेयर बाजार, सोना-चांदी और निवेशकों की रणनीति पर भी पड़ता दिख रहा है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में भारतीय बाजारों में उतार-चढ़ाव और कीमती धातुओं में तेजी देखने को मिल सकती है। ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं। इंटरनेट बंदी और सख्त कार्रवाई के बावजूद लोग सड़कों पर उतरकर आयतुल्लाह अली खामेनेई के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। इसी बीच ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि वह इन प्रदर्शनों के समर्थन में किसी भी तरह के सैन्य हस्तक्षेप से दूर रहे। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका “मदद के लिए तैयार” है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर आकस्मिक योजनाएं बनानी शुरू कर दी हैं। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य जमावड़े के संकेत मिल रहे हैं, जो हालात को और संवेदनशील बना सकते हैं। सेबी रजिस्टर्ड फंडामेंटल एनालिस्ट के मुताबिक, ईरान की सीमाओं के आसपास बढ़ता सैन्य तनाव निवेशकों की धारणा (सेंटिमेंट) को प्रभावित करेगा। ऐसे हालात में जोखिम भरी संपत्तियों से पैसा निकलकर सुरक्षित निवेश की ओर जाता है। एनालिस्टों का मानना है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष की आशंका से भारतीय शेयर बाजार में फ्लैट से लेकर नकारात्मक शुरुआत हो सकती है। अनिश्चितता बढ़ने पर विदेशी संस्थागत निवेशक भी सतर्क रुख अपनाते हैं, जिससे बाजार पर दबाव बनता है। गौरतलब है कि 9 जनवरी को भारतीय शेयर बाजार लगातार पांचवें सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स 605 अंक (0.72%) टूटकर 83,576.24 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50, 194 अंक (0.75%) गिरकर 25,683.30 पर आ गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली, जो बताता है कि निवेशक पहले से ही सतर्क हैं। - सोना-चांदी क्यों बनते हैं सुरक्षित विकल्प जब भी वैश्विक स्तर पर युद्ध या बड़े भू-राजनीतिक तनाव की आशंका बढ़ती है, निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। सोना और चांदी को पारंपरिक रूप से “सेफ हेवन” माना जाता है। सेबी रजिस्टर्ड कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के अनुसार, ईरान के आसपास अमेरिकी सैन्य तैनाती की खबरों से सोना और चांदी दोनों में तेजी के संकेत हैं। उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में गैप-अप ओपनिंग हो सकती है। -कीमतों का संभावित गणित विशेषज्ञों का अनुमान है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,550 डॉलर प्रति औंस तक जा सकता है। वहीं, भारतीय बाजार में एमसीएक्स पर सोने की कीमतें 1,42,000 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की संभावना है। वहीं चांदी की बात करें तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके 82 से 85 डॉलर प्रति औंस तक जाने के आसार हैं। घरेलू बाजार में एमसीएक्स पर चांदी 2,56,000 से 2,60,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच सकती है। निवेशकों के लिए क्या रणनीति विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात में निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए। शेयर बाजार में शॉर्ट टर्म में दबाव रह सकता है, जबकि सोना-चांदी जैसे सुरक्षित विकल्प मजबूती दिखा सकते हैं। हालांकि, लंबी अवधि के निवेशकों को घबराने के बजाय संतुलित पोर्टफोलियो बनाए रखने की सलाह है। अंतरराष्ट्रीय तनाव कब और कैसे खत्म होगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन इतना तय है कि इसका असर बाजारों पर फिलहाल बना रहेगा।