12-Jan-2026
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न्यूयार्क (ईएमएस)। बेहद कम लोगों को मालूम होगा कि साल 1997 में आईफोन बनाने वाली एप्पल कंपनी के पास मुश्किल से 90 दिनों का कैश बचा था। अगर हालात नहीं बदलते, तो शायद आज न आईफोन होता और न ही मैकबुक। ऐपल कंपनी आज भले ही दुनिया की सबसे मूल्यवान कंपनियों में शुमार हो, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब यह पूरी तरह बर्बादी के कगार पर खड़ी थी। ऐसे नाजुक समय में ऐपल के ऑफिस में एक अहम मीटिंग चल रही थी। तभी उस शख्स की एंट्री हुई, जिसे 12 साल पहले उसी की बनाई कंपनी से बाहर कर दिया गया था स्टीव जॉब्स। मीटिंग रूम में दर्जनों प्रोडक्ट्स की लिस्ट पड़ी थी। इंजीनियर और मैनेजर अपने-अपने आइडिया लेकर तैयार थे। लेकिन स्टीव जॉब्स ने किसी की नहीं सुनी। उन्होंने बोर्ड पर एक बड़ा सा ‘एक्स’ बनाया और साफ शब्दों में कहा कि हमें इस सारे कचरे की जरूरत नहीं है। उन्होंने ऐलान किया कि ऐपल अब सिर्फ चार प्रोडक्ट्स बनाएगा। उस वक्त लोगों को यह फैसला पागलपन लगा, लेकिन यही कदम आगे चलकर ऐपल को ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बनाने की नींव बना। स्टीव जॉब्स की सफलता के पीछे कोई रॉकेट साइंस नहीं था। उन्होंने बस भीड़ से अलग सोचने की हिम्मत दिखाई। उनका मानना था कि ज्यादा फीचर्स नहीं, बल्कि बेहतर अनुभव जरूरी है। यही सोच आगे चलकर ऐपल की पहचान बन गई। स्टीव का बचपन साधारण था। उन्हें गोद लिया गया था। कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ दी, लेकिन सीखना नहीं छोड़ा। उन्होंने कैलीग्राफी सीखी, जिसे लोग बेकार मानते थे, लेकिन यही कला यादगार फोंट्स के रूप में मैक कंप्यूटर की जान बनी। स्टीव जॉब्स ने अपने दोस्त स्टीव वोजनिएक के साथ एक गैरेज से ऐपल की शुरुआत की थी। उनका सपना था कि कंप्यूटर सिर्फ दफ्तरों तक सीमित न रहें, बल्कि आम लोगों तक पहुंचें। ऐपल 1 और ऐपल 2 ने बाजार में हलचल मचा दी। लेकिन काम को लेकर स्टीव की सनक और टकराव भरे रवैये के कारण 1985 में उन्हें अपनी ही कंपनी से बाहर कर दिया गया। यह उनके लिए बड़ा झटका था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। इसके बाद उन्होंने नेक्स्ट कंपनी बनाई और पिक्सर को खरीदा, जिसने एनिमेशन की दुनिया बदल दी। उधर, स्टीव के बिना ऐपल भ्रम और असफलताओं में फंसती चली गई। जब हालात बिगड़े, तो ऐपल ने नेक्स्ट को खरीद लिया और स्टीव जॉब्स की वापसी हुई। लौटते ही स्टीव ने 70 फीसदी प्रोडक्ट्स बंद कर दिए और सादगी को अपना मंत्र बनाया। इसी सोच से आईमैक, आईपॉड और फिर 2007 में आईफोन जन्मा, जिसने मोबाइल की परिभाषा बदल दी। सुदामा/ईएमएस 12 जनवरी 2026