12-Jan-2026
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ढाका(ईएमएस)। बांग्लादेश के नरसिंगदी जिले में एक हिंदू किराना व्यवसायी की नृशंस हत्या को लेकर देश की अंतरिम सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के कार्यालय ने मोनी चक्रवर्ती की मौत को सांप्रदायिक हमला मानने से इनकार करते हुए इसे पारिवारिक और व्यापारिक विवाद का परिणाम बताया है। सरकार का दावा है कि पीड़ित की धार्मिक पहचान का सहारा लेकर इस घटना के पीछे झूठा प्रोपेगैंडा फैलाया गया है। गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ्तों में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं को निशाना बनाए जाने की कई खबरें सामने आई हैं। इन घटनाओं पर भारत सरकार ने भी गहरी चिंता व्यक्त की है और अंतरिम सरकार से हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा ऐसी हिंसा पर तत्काल विराम लगाने का आग्रह किया है। मुख्य सलाहकार के वरिष्ठ सहायक प्रेस सचिव फोयेज अहमद ने इस मामले पर जानकारी देते हुए कहा कि पुलिस और पीड़ित परिवार की शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि हत्या के पीछे पुरानी कारोबारी रंजिश और पारिवारिक कलह थी। उन्होंने कहा कि हाल की कुछ घटनाओं में यह देखा गया है कि गलत जानकारी फैलाकर सांप्रदायिक सद्भावना को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है। अहमद ने चेतावनी दी कि बिना तथ्यों की जांच किए किसी भी घटना को सांप्रदायिक रंग देना समाज के लिए हानिकारक हो सकता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर बयान देने वालों से आग्रह किया कि वे किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जमीनी हकीकत और तथ्यों की जांच अवश्य करें। दूसरी ओर, नरसिंगदी जिले के पलाश उपजिला स्थित चारसिंदूर बाजार में हुई इस हत्या ने स्थानीय लोगों को झकझोर कर रख दिया है। 40 वर्षीय मोनी चक्रवर्ती अपनी किराना दुकान बंद कर जब रात को घर लौट रहे थे, तब अज्ञात हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला किया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। चक्रवर्ती के करीबी दोस्तों और स्थानीय निवासियों का कहना है कि वह इलाके में काफी सम्मानित व्यक्ति थे। उनके एक मित्र राजेंद्र चौहान ने बताया कि मोनी एक बहुत ही मिलनसार व्यक्ति थे और यह सोचना भी मुश्किल है कि उनका कोई दुश्मन हो सकता था। हालांकि, उन्होंने भी हत्या के पीछे किसी चरमपंथी समूह की संलिप्तता या धार्मिक मकसद की जानकारी होने से इनकार किया है। स्थानीय लोग इस समय डरे हुए हैं और हमलावरों की जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने स्पष्ट किया है कि तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने से सामाजिक और सांप्रदायिक ढांचा कमजोर होता है, इसलिए शांति बनाए रखना आवश्यक है। वीरेंद्र/ईएमएस/12जनवरी2026