नई दिल्ली (ईएमएस)। आगामी समय में ड्रोन न केवल तकनीकी दुनिया में बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में भी अहम भूमिका निभाते नजर आएंगे। साल 2026 ड्रोन तकनीक के लिए टर्नअराउंड साबित होने जा रहा है। सबसे बड़ा बदलाव कृषि क्षेत्र में देखने को मिलेगा, जहां करीब 14,500 ड्रोन खेती-किसानी के काम में तैनात किए जाने की तैयारी है। इससे खेती का पूरा इकोसिस्टम बदल जाएगा। ये ड्रोन मिट्टी की जांच, खाद और दवा के छिड़काव से लेकर फसलों की सेहत पर लगातार नजर रखेंगे। जहां एक व्यक्ति को एक एकड़ खेत में दवा छिड़कने में आधा दिन लग जाता है, वहीं ड्रोन यह काम महज 8 मिनट में पूरा कर देंगे। इतना ही नहीं, फसलों में बीमारी फैलने से पहले ही उसकी पहचान कर समय रहते समाधान भी संभव होगा। ड्रोन का इस्तेमाल अब केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा। 2026 में सुरक्षा, सर्विलांस, सड़क दुर्घटनाओं और प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और भूकंप के दौरान ड्रोन रेस्क्यू टीम से पहले घटनास्थल पर पहुंचेंगे। कई दक्षिणी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में पुलिस, वन विभाग और आपदा प्रबंधन टीमें ड्रोन को अपने सिस्टम का हिस्सा बना रही हैं। आमतौर पर किसी दुर्घटना स्थल तक पुलिस या मेडिकल टीम को पहुंचने में 40 से 45 मिनट लग जाते हैं, लेकिन ड्रोन 5 से 10 मिनट में वहां पहुंचकर लाइव वीडियो और तस्वीरें भेज सकेंगे, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन तेज और प्रभावी होगा। नागरिक सुरक्षा में भी ड्रोन की भूमिका अहम होगी। अगर कोई महिला सेफ्टी ऐप के जरिए इमरजेंसी बटन दबाती है, तो सूचना मिलते ही कुछ ही मिनटों में ड्रोन उसकी लोकेशन पर पहुंच सकेंगे। ये एआई आधारित ड्रोन सायरन बजाकर मदद का संकेत देंगे और अपराध को रोकने में मददगार साबित होंगे। इसके अलावा ऊंची इमारतों की सफाई, पेंटिंग, सोलर पैनल की क्लीनिंग और पावर लाइन की मरम्मत जैसे जोखिम भरे काम भी ड्रोन के जरिए किए जाएंगे, जिससे समय और संसाधनों की बचत होगी। ड्रोन अब आधुनिक युद्धनीति का भी अहम हिस्सा बनते जा रहे हैं। एआई और 5जी से लैस नए ड्रोन 40 से 50 किलोमीटर तक बिना सिग्नल के उड़ान भरने और घंटों तक ऑपरेशन करने में सक्षम होंगे। ये जैमर को चकमा देने और जीपीएस के बिना काम करने की क्षमता रखते हैं। लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन में भी ड्रोन की भूमिका बढ़ेगी, खासकर दूरदराज के इलाकों में मेडिकल सप्लाई और जरूरी सामान पहुंचाने में। सुदामा/ईएमएस 12 जनवरी 2026