राष्ट्रीय
12-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारत में पाए जाने वाले ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते और वे इंसानों से टकराव की बजाय उनसे दूरी बनाकर रखना पसंद करते हैं। सही जानकारी के अभाव और पीढ़ियों से चली आ रही भ्रांतियों के कारण सांपों को बेवजह इंसान का दुश्मन समझ लिया गया है, जबकि प्रकृति के संतुलन और मानव जीवन में उनकी भूमिका बेहद अहम है। विशेषज्ञों का कहना है कि समाज में यह धारणा गहराई तक बैठ चुकी है कि सांप अगर किसी को काट ले तो उसकी जान बचना मुश्किल है, लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है। वास्तव में सभी सांप जहरीले नहीं होते। भारत में सांपों की लगभग 300 से 350 प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि दुनिया भर में इनकी संख्या करीब 4000 के आसपास है। इनमें से भारत में केवल लगभग 10 प्रतिशत सांप ही जहरीले होते हैं, जबकि शेष करीब 90 प्रतिशत सांप पूरी तरह गैर-जहरीले होते हैं और इंसानों के लिए कोई गंभीर खतरा नहीं बनते। सांप आमतौर पर इंसानों से बचने की कोशिश करते हैं। जैसे ही उन्हें किसी व्यक्ति की मौजूदगी का अहसास होता है, वे वहां से निकलने का रास्ता तलाशते हैं और दरारों, बिलों, झाड़ियों या कूड़े-कचरे के ढेर में छिप जाते हैं। अधिकतर मामलों में सांप तभी काटते हैं, जब गलती से उन पर पैर पड़ जाए या उन्हें छेड़ा जाए, जैसे डंडे से मारने या उकसाने की कोशिश की जाए। इसलिए सावधानी बरतने से अधिकांश हादसों को टाला जा सकता है। मौसम के साथ सांपों की गतिविधियों में भी बदलाव आता है। गर्मी और मानसून के मौसम में वे अधिक सक्रिय रहते हैं, जबकि सर्दियों में तापमान गिरते ही ज्यादातर सांप हाइबरनेशन में चले जाते हैं और जमीन के नीचे या सुरक्षित स्थानों में छिप जाते हैं। हालांकि सर्दियों में अगर कुछ दिन लगातार धूप निकलती है, तो वे बाहर आकर धूप सेंकते नजर आ सकते हैं। भारत में सबसे ज्यादा जहरीले माने जाने वाले सांपों में कोबरा, करैत और वाइपर शामिल हैं। कोबरा की पहचान उसके फन से होती है, जिसे वह खतरा महसूस होने पर फैलाकर चेतावनी देता है। करैत आमतौर पर शांत स्वभाव का होता है और रात में ज्यादा सक्रिय रहता है, जबकि वाइपर दिन और रात दोनों समय सक्रिय हो सकता है और इसका सिर त्रिकोणीय आकार का होता है। जानकार बताते हैं कि अलग-अलग सांपों का जहर शरीर पर अलग तरीके से असर करता है। कोबरा और करैत का जहर नर्वस सिस्टम पर असर डालता है, जबकि वाइपर का जहर रक्त संचार प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है। अगर किसी व्यक्ति को जहरीला सांप काट ले, तो बिना समय गंवाए उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए, ताकि समय रहते एंटी-वेनम दिया जा सके। झाड़-फूंक या घरेलू उपायों में समय गंवाना जानलेवा साबित हो सकता है। कई बार एंटी-वेनम मिलने के बाद भी शरीर को पूरी तरह ठीक होने में समय लग सकता है, जो जहर की मात्रा पर निर्भर करता है। यह भी सच है कि सभी सांप नुकसानदेह नहीं होते। धामन जैसे सांप पूरी तरह गैर-जहरीले होते हैं और खेतों व बस्तियों में चूहों की संख्या कम करके किसानों के लिए मददगार साबित होते हैं। सुदामा/ईएमएस 12 जनवरी 2026