अंतर्राष्ट्रीय
12-Jan-2026
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तेहरान,(ईएमएस)। ईरान में जारी व्यापक जनविद्रोह अब एक भयावह और रक्त रंजित दौर में प्रवेश कर चुका है। पिछले दो हफ्तों से सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकार ने अब तक का सबसे कठोर रुख अपनाते हुए उन्हें सीधे तौर पर मौत की सजा देने का ऐलान किया है। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के निर्देशों के बाद प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को सजा-ए-मौत देने का फैसला सुनाया है। सरकार का कहना है कि विद्रोह में शामिल लोगों को खुदा का दुश्मन माना जाएगा और यह सजा न केवल प्रदर्शन करने वालों पर, बल्कि उनकी मदद करने वालों पर भी लागू होगी। ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने इस संबंध में आधिकारिक चेतावनी जारी करते हुए मोहरेब कानून का हवाला दिया है। इस क्रूर कानून के अनुच्छेद 190 के तहत, दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को फांसी पर लटकाने, उसके हाथ-पैर काटने या उसे स्थायी रूप से देश निकाला देने का प्रावधान है। सरकार की इस घोषणा ने देशभर में खौफ और आक्रोश को और बढ़ा दिया है। जानकारों का मानना है कि इस कानून का इस्तेमाल शासन के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को स्थायी रूप से खामोश करने के लिए किया जा रहा है। ईरान में इस समय सूचनाओं का पूरी तरह से अकाल है क्योंकि सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। वैश्विक इंटरनेट निगरानी संस्थाओं के अनुसार, ईरान में कनेक्टिविटी सामान्य के मुकाबले महज 1 प्रतिशत रह गई है। इस पूर्ण संचार ब्लैकआउट को लेकर विशेषज्ञ आशंकित हैं कि शासन इसकी आड़ में बड़े पैमाने पर नरसंहार को अंजाम दे सकता है। आधिकारिक रूप से अब तक करीब 60 मौतों की पुष्टि हुई है, लेकिन स्थानीय सूत्रों और डॉक्टरों के हवाले से चौंकाने वाले दावे सामने आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि अकेले तेहरान में ही 217 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। शिराज और तेहरान के अस्पताल घायलों से पटे हुए हैं, जिनमें से अधिकांश को सुरक्षाबलों ने सीधे गोलियां मारी हैं। अस्पतालों में दवाओं की कमी और इंटरनेट न होने से घायलों की सटीक संख्या का पता लगाना भी मुश्किल हो गया है। वीरेंद्र/ईएमएस 12 जनवरी 2026