12-Jan-2026
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अराग्ची की भारत यात्रा का अहम एजेंडा चाबहार बंदरगाह था, अप्रैल में खत्म हो रही छूट नई दिल्ली,(ईएमएस)। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग्ची की भारत यात्रा रद्द हो गई है। यह यात्रा 15-16 जनवरी को होनी थी। ईरान में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और बाहरी हस्तक्षेप के खतरे के कारण यह फैसला लिया है। ऐसे हालात में क्षेत्र में बड़ा संघर्ष छिड़ सकता है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो वह इजराइल और अमेरिकी सैन्य अड्डों पर जवाबी कार्रवाई करेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि वे ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक भारत इस स्थिति पर नजर रखे हुए है। अगर हालात बिगड़ते हैं और संघर्ष शुरू होता है, तो भारतीय नागरिकों को निकालने की योजना भी तैयार कर ली गई है। पिछले साल भी जब ईरान पर इजराइल और अमेरिका ने हमले किए थे, तब भारत ने अपने नागरिकों को वहां से निकाला था। सूत्रों के मुताबिक अगर बाहरी ताकतें ईरान पर हमला करती हैं तो संघर्ष शुरू हो सकता है। ईरान की सरकार शायद अंदरूनी विरोध प्रदर्शनों को संभाल ले, लेकिन बाहरी हमले से स्थिति और खराब हो सकती है। अराग्ची की भारत यात्रा का एक अहम एजेंडा चाबहार बंदरगाह था। अमेरिका की ओर से इस बंदरगाह के लिए दी गई छूट अप्रैल में खत्म हो रही है। यह रणनीतिक रूप से अहम बंदरगाह भारत के प्रबंधन में है। भारत पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड इसे 2024 से 10 साल के लिए चला रही है। अराग्ची को विदेश मंत्री एस जयशंकर के अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल से भी मिलना था। बता दें चाबहार बंदरगाह सिर्फ अफगानिस्तान के लिए ही नहीं, बल्कि मध्य एशियाई देशों के लिए भी एक प्रवेश द्वार है। यह बंदरगाह रूस के उन हिस्सों को भी जोड़ता है जो मध्य एशिया से सटे हैं। अक्टूबर 2025 में भारत को अमेरिका से इस बंदरगाह के लिए 6 महीने की छूट मिली थी। 13 मई, 2024 को भारत ने इस बंदरगाह को 10 साल के लिए संचालित करने का एक अनुबंध किया था। यह पहली बार था जब भारत ने किसी विदेशी बंदरगाह का प्रबंधन अपने हाथ में लिया था। सिराज/ईएमएस 12जनवरी26 ----------------------------------