राष्ट्रीय
12-Jan-2026


मुंबई (ईएमएस)। महाराष्ट्र में बीएमसी सहित निकाय चुनाव से पहले महायुति गठबंधन के भीतर की दरारें खुलकर सामने आई हैं। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बीच बीएमसी और नगर निकाय चुनावों से पहले आरोप-प्रत्यारोप दौर जारी हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब पिंपरी-चिंचवड नगर निगम (पीसीएमसी) चुनाव प्रचार के दौरान पवार ने सीएम फडणवीस पर पलटवार किया। राज्य के उपमुख्यमंत्री पवार ने कहा कि वह केवल प्रशासनिक विफलताओं को उजागर कर रहे हैं, व्यक्तिगत हमले नहीं कर रहे। उन्होंने बीएमसी में हुए भ्रष्टाचार, कुशासन और 2017 से 2022 तक के वादों की अवहेलना का आरोप लगाया। एनसीपी नेता पवार ने झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) परियोजनाओं में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की और कुछ बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत वृद्धि का उदाहरण दिया, जैसे एक पुल की लागत 70 लाख रुपये से बढ़कर 7 करोड़ रुपये हुई। उन्होंने कहा कि चुनावों के समय ही कुछ नेता मुखर होते हैं, जिसका इशारा फडणवीस की ओर था। अपने गठबंधन के चुनावी एजेंडे में पवार ने कई प्रमुख वादे किए। इसमें 500 वर्ग फुट तक के घरों पर संपत्ति कर में छूट, मसौदा विकास योजना को रद्द करना, दैनिक जल आपूर्ति, मुफ्त बस और मेट्रो यात्रा, बेहतर सड़कें, प्रदूषण नियंत्रण, आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं और आदर्श विद्यालय शामिल हैं। इसके अलावा छात्रों के लिए मुफ्त टैबलेट और कौशल प्रशिक्षण पूरा करने वाली महिलाओं को 5 लाख रुपये तक के ब्याज मुक्त ऋण देने का प्रस्ताव भी है। बीएमसी चुनाव से पहले जुबानी जंग ने महायुति गठबंधन की एकता पर सवाल खड़ा कर दिया है। पवार और फडणवीस के बीच यह विवाद यह दर्शाता है कि सत्ता साझा होने के बावजूद दोनों दल अपने राजनीतिक एजेंडे और जनता के मुद्दों को लेकर मुखर हैं। यह टकराव आगामी चुनावों में गठबंधन की रणनीति और वोटर प्रभावित करने की क्षमता पर प्रभाव डाल सकता है। आशीष दुबे / 12 जनवरी 2026