राष्ट्रीय
12-Jan-2026


पटना,(ईएमएस)। थैलेसीमिया पीड़िता 06 बच्चों का नया बैच 13 जनवरी को बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के लिए वेल्लोर रवाना हुआ। यह पीड़ित बच्चों का चौथा बैच होगा। इसके पहले अलग-अलग समय में 26 बच्चों का सफलतापूर्वक इलाज हो चुका है। बिहार सरकार की ओर से थैलेसीमिया, हीमोफिलिया एवं सिकल सेल एनीमिया के मरीजों के लिए आवश्यक सुविधा सुनिश्चित कराने के लिए कई स्तर पर काम हो रहे हैं। इसमें मुख्य रूप से एकीकृत डे केयर केंद्रों की स्थापना और यहां जांच, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, एंटी हेमोफिलिक फैक्टर (एएचएफ) ट्रांसफ्यूजन, आयरन चेलेटिंग आदि की दवाएं उपलब्ध होती हैं। इसी कड़ी में नीतीश कुमार सरकार ने 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल थैलेसीमिया योजना चला रखी है। इसके तहत वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) के साथ सरकार का समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ है। संस्थान में बीमारी से पीड़ित बच्चों का निशुल्क बोन मैरो ट्रांसप्लांट होता है। इस योजना के तहत अभी तक कुल 26 बच्चों में सफलतापूर्वक बोन मैरो ट्रांसप्लांट हो चुका है। पहली बार विभागीय मंत्री के साथ 13 बच्चों का बैच 2024-25 में इलाज के लिए वेल्लोर भेजा गया था। राज्य स्वास्थ्य समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि बीएमटी के लिए जाने वाले बच्चे अपने परिजनों के साथ तीन महीने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की देखरेख में वेल्लोर में रहने वाले है। इसके बाद उनकी वापसी होगी। पदाधिकारियों ने बताया कि इलाज के बाद लौटने वाले बच्चों को दो साल तक नियमित जांच के लिए सीएमसी जाना होगा। थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट कराने के साथ ही इलाज की प्रकिया पूरी कराने के लिए सरकार प्रति मरीज 15 लाख रुपए खर्च करती है। इस राशि में मरीज, डोनर व माता-पिता के आने-जाने, अस्पताल में इलाज, वेल्लोर में रहने, खाने-पीने आदि का खर्च शामिल है। आशीष दुबे / 12 जनवरी 2026