राष्ट्रीय
12-Jan-2026
...


-आरक्षण व्यवस्था में क्रीमी लेयर लागू करने जनहित याचिका पर सुनवाई नई दिल्ली,(ईएमएस)। सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) आरक्षण व्यवस्था में ‘क्रीमी लेयर’ लागू करने की मांग से जुड़ी एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में सभी पक्षों से जवाब तलब करते हुए कहा है कि वह याचिका में उठाए गए संवैधानिक और सामाजिक पहलुओं पर विचार करेगी। यह जनहित याचिका अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई है। याचिका में तर्क दिया गया है कि आरक्षण का लाभ वास्तव में उन लोगों तक पहुंचना चाहिए, जो आज भी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि एससी/एसटी वर्ग के कुछ परिवार अब सरकारी सेवाओं, प्रशासनिक पदों और संवैधानिक पदों में प्रतिनिधित्व हासिल कर चुके हैं और वे सामाजिक रूप से सशक्त हो गए हैं। ऐसे में उनके बच्चों को आरक्षण का लाभ मिलते रहना समानता के अधिकार के विपरीत है। याचिकाकर्ता ने यह भी मांग की है कि जिन एससी/एसटी परिवारों में माता-पिता या अभिभावक केंद्र या राज्य सरकार की ग्रुप-ए या ग्रुप-बी सेवाओं में कार्यरत हैं, या जो संवैधानिक पदों पर रहे हैं, उनके बच्चों को आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाए। याचिकाकर्ता के अनुसार, इससे आरक्षण का लाभ उन परिवारों तक पहुंचेगा, जो अब भी हाशिये पर हैं और जिन्हें इसकी वास्तविक जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए पहले से ही ‘क्रीमी लेयर’ का सिद्धांत लागू है, ताकि संपन्न वर्ग आरक्षण का अनुचित लाभ न उठा सके। ऐसे में समानता के संवैधानिक सिद्धांत के तहत एससी/एसटी आरक्षण में भी इस व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। हालांकि, इससे पहले कई मामलों में सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि एससी/एसटी आरक्षण का आधार ऐतिहासिक सामाजिक भेदभाव और छुआछूत रहा है, न कि केवल आर्थिक पिछड़ापन। ऐसे में इस मुद्दे पर अदालत का रुख हमेशा संवेदनशील और संतुलित रहा है। हिदायत/ईएमएस 12जनवरी26