14-Jan-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध इस समय एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मोड़ पर हैं। पिछले कुछ समय से दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में जो तनाव और उतार-चढ़ाव देखा जा रहा था, अब उसमें सुधार की नई उम्मीदें जागती नजर आ रही हैं। हाल ही में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री (स्टेट सचिव) मार्को रूबियो के बीच फोन पर हुई लंबी बातचीत ने ठप पड़ी ट्रेड डील को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। इस बातचीत का मुख्य केंद्र द्विपक्षीय व्यापारिक गतिरोध को समाप्त करना और भविष्य के लिए एक ठोस आर्थिक ढांचा तैयार करना रहा। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब व्यापारिक मोर्चे पर दोनों देशों के बीच कड़वाहट बढ़ गई थी। पिछले दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाने की चेतावनी दी गई थी, जिससे बाजार और कूटनीतिक गलियारों में चिंता की स्थिति बन गई थी। 13 जनवरी को प्रस्तावित व्यापार वार्ता के आगे न बढ़ने से भी निराशा हाथ लगी थी, लेकिन जयशंकर और रूबियो की इस ताजा चर्चा ने एक बार फिर दोनों देशों को मेज पर ला खड़ा किया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की दिशा में कदम आगे बढ़ सकते हैं। व्यापार के अलावा दोनों नेताओं ने महत्वपूर्ण खनिज, न्यूक्लियर सहयोग, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को लेकर भी विस्तार से चर्चा की। भारत में अमेरिकी राजदूत गोर ने इस संवाद को अत्यंत सकारात्मक बताते हुए संकेत दिए हैं कि अगले महीने व्यापारिक मुद्दों पर उच्च स्तरीय बैठकों का दौर शुरू हो सकता है। दरअसल, भारत और अमेरिका दोनों ने ही साल 2030 तक अपने द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का एक बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। व्यापार घाटे को कम करने के लिए भारत ने अमेरिका से ऊर्जा और रक्षा उपकरणों की खरीद बढ़ाने का भरोसा भी दिलाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका नागरिक परमाणु सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भारत के साथ मिलकर काम करने को उत्सुक है। अमेरिका चाहता है कि अमेरिकी कंपनियों के लिए भारत में अवसर बढ़ें और जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन सुरक्षित रहे। इस कूटनीतिक हलचल के पीछे कुछ और भी महत्वपूर्ण कारण माने जा रहे हैं। भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद में कटौती करने के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि अमेरिका भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ को हटा सकता है। साथ ही, भारत की यूरोपीय यूनियन के साथ बढ़ती व्यापारिक निकटता और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर ईयू नेतृत्व की भारत यात्रा को देखते हुए अमेरिका भी अपने हितों को साधने के लिए वार्ता में तेजी लाना चाहता है। यदि अमेरिका अपनी टैरिफ नीतियों में ढील देता है, तो निश्चित रूप से आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार की एक नई इबारत लिखी जा सकती है। वीरेंद्र/ईएमएस/14जनवरी2026