अंतर्राष्ट्रीय
14-Jan-2026


पंजाब में बवाल, लोग बोले-सरकार पूरे इलाज का लाइव टेलीकास्ट करना चाहती लाहौर,(ईएमएस)। पाकिस्तान के सबसे बड़े सूबे पंजाब में सरकार ने एक ऐसा फरमान जारी किया है, जिसने मेडिकल जगत में हलचल मचा दी है। पंजाब सरकार ने सरकारी अस्पतालों में काम करने वाली नर्सों, वार्ड बॉय और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ के शरीर पर ‘बॉडी कैमरा’ फिट करने का फैसला किया है। सरकार का तर्क है कि इससे भ्रष्टाचार रुकेगा, सुरक्षा बढ़ेगी, लेकिन डॉक्टर और नर्स इसे मरीजों की प्राइवेसी पर सबसे बड़ा हमला बता रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि लेबर रूम से लेकर ऑपरेशन थिएटर तक जहां मरीज सबसे ज्यादा संवेदनशील हालत में होते हैं, वहां कैमरे से रिकॉर्डिंग करना क्या जायज है? मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने हाल ही में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के नाम पर यह फैसला लिया है। आदेश के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में तैनात पैरामेडिकल स्टाफ, नर्सें, वार्ड बॉय, फार्मेसी कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड शामिल हैं, अपनी ड्यूटी के दौरान बॉडी कैम पहनेंगे। ये कैमरे उनकी वर्दी पर लगे होंगे और उनकी हर गतिविधि को रिकॉर्ड करेंगे। सिर्फ इतना ही नहीं, ड्यूटी के दौरान डॉक्टरों और नर्सों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर भी बैन लगाने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि मोबाइल के कारण काम प्रभावित होता है। इस विवादित फैसले के पीछे सरकार ने ‘भ्रष्टाचार’ और ‘सुरक्षा’ को मुख्य वजह बताया है। पंजाब के विशेष स्वास्थ्य सचिव अजमत महमूद ने बताया कि अस्पतालों में मरीजों की ‘चोरी’ हो रही है। कई सरकारी अस्पतालों में ऐसे कर्मचारी सक्रिय हैं जो मरीजों को बहला-फुसलाकर निजी अस्पतालों में भेज देते हैं। इसके बदले उन्हें कमीशन मिलता है। इतना ही नहीं, सरकारी अस्पताल में मरीज का नंबर जल्दी लगवाने के लिए भी पैसे ऐंठे जाते हैं। सरकार का मानना है कि जब वार्ड बॉय और नर्सों के शरीर पर कैमरा लगा होगा, तो वे मरीजों से रिश्वत नहीं मांग पाएंगे और न ही उन्हें निजी अस्पतालों में रेफर कर पाएंगे। लाहौर के एक सरकारी अस्पताल में काम करने वाली एक नर्स ने कहा कि उसने लेबर रूम में काम किया है, मरीजों को यूरीन कैथेटर लगाए हैं और उनके शरीर के बेहद निजी अंगों पर घावों की सफाई की है। एक नर्स के तौर पर हमें मरीज के शरीर को कई बार पूरी तरह देखना पड़ता है। जरा सोचिए, अगर यह सब करते वक्त एक कैमरा लगा हो जो सब रिकॉर्ड कर रहा हो, तो उस मरीज की क्या इज्जत रह जाएगी? लाहौर के निजी अस्पताल के मालिक ने कहा कि पाकिस्तान में ‘सेफ सिटी’ प्रोजेक्ट के तहत लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज तक लीक हो जाती है और सोशल मीडिया पर वायरल हो जाती है। कौन गारंटी देगा कि अस्पताल के अंदर रिकॉर्ड किया गया वीडियो सुरक्षित रहेगा? अगर किसी महिला मरीज का आपत्तिजनक वीडियो लीक हो गया, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? ‘यंग डॉक्टर्स एसोसिएशन’ पंजाब के महासचिव डॉ. हसीब का कहना है कि यह फैसला मेडिकल एथिक्स के खिलाफ है। उन्होंने कहा डॉक्टर और मरीज का रिश्ता भरोसे का होता है। हम शपथ लेते हैं कि मरीज की बीमारी और उसकी निजी जानकारी गोपनीय रखेंगे, लेकिन सरकार तो पूरे इलाज का लाइव टेलीकास्ट करना चाहती है। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है जहां पूरे नर्सिंग स्टाफ को बॉडी कैम पहना दिया गया हो। इससे नए डॉक्टर और नर्स दबाव में आ जाएंगे और इलाज पर ध्यान देने के बजाय कैमरे से डरते रहेंगे। विरोध को देखते हुए स्वास्थ्य सचिव अजमत महमूद ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि “नर्सों को ये कैमरे सबसे आखिर में लगाए जाएंगे। हम निजता के मुद्दे का कोई तकनीकी समाधान निकालेंगे। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह समाधान क्या होगा। साथ ही डॉक्टरों के मोबाइल बैन और रिकॉर्डेड डेटा के स्टोरेज को लेकर सरकार के पास कोई ठोस जवाब नहीं है। सिराज/ ईएमएस14जनवरी26