नई दिल्ली,(ईएमएस)। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय सेना की सोच में स्पष्ट बदलाव आया है और वह न केवल वर्तमान चुनौतियों का सामना कर रही है, बल्कि भविष्य में युद्ध के विभिन्न स्वरूपों के लिए भी सुनियोजित तैयारी में जुटी है। इन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, सेना ने नई संरचनाएं बनाई हैं, जिन्हें विकसित और जटिल परिचालन परिवेशों में प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार, सुसज्जित और प्रशिक्षित किया जा रहा है। 78वें सेना दिवस परेड के बाद प्रेसवार्ता को संबोधित कर सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने कहा कि परिवर्तन के अंतर्गत, भैरव बटालियन, अश्विनी प्लाटून, शक्तिबान रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी जैसी इकाइयां गठित हुई हैं। ये भविष्य की परिचालन आवश्यकताओं के अनुरूप चुस्त, उत्तरदायी और मिशन-उन्मुख बलों के निर्माण के हमारे प्रयासों को दिखाता हैं। यात्रा के केंद्र में आत्मनिर्भरता है, जो परेड के दौरान प्रदर्शित मेड इन इंडिया उपकरणों से स्पष्ट रूप से दिखाई दी। भारत में निर्मित और विकसित हथियार प्रणालियों और उपकरणों की आवश्यकता पर जोर देकर सेना प्रमुख ने कहा कि स्वदेशीकरण रणनीतिक आवश्यकता बना है। उन्होंने कहा कि इससे हमें परिचालन लचीलापन, दीर्घकालिक विश्वसनीयता और अपनी तैयारियों में अधिक आत्मविश्वास मिलता है। ऐसी क्षमताएं जो सैन्य और नागरिक दोनों उद्देश्यों की पूर्ति कर सकें। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विकसित अवसंरचना, प्रौद्योगिकी और नवाचार को राष्ट्रीय विकास में भी योगदान देना चाहिए। सेना सशक्त सैनिकों, आधुनिक सहायक प्रणालियों और कई क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता के साथ भविष्य के लिए तैयार बल के रूप में निरंतर विकसित हो रही है। भारतीय सेना सशक्त सैनिकों, आधुनिक सहायक प्रणालियों और कई क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से कार्य करने की क्षमता के साथ भविष्य के लिए तैयार बल के रूप में निरंतर विकसित हो रही है। आशीष दुबे / 15 जनवरी 2026