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15-Jan-2026
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- जन्मदिन बना सियासी संदेशों का मंच, ‘जनकल्याणकारी दिवस’ से 2027 की तैयारी तेज - बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा’ और उसके अंग्रेजी संस्करण का विमोचन - सभी चुनाव अकेले लड़ेगी, गठबंधन से पार्टी को नुकसान लखनऊ (ईएमएस)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गुरुवार को अपना 70वां जन्मदिन मनाया। यह मौका सिर्फ व्यक्तिगत उत्सव का नहीं, बल्कि एक बड़े सियासी संदेश का भी बना। बसपा ने इस दिन को पूरे प्रदेश में ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रूप में मनाया, वहीं सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही खेमों से उन्हें शुभकामनाएं मिलीं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव तक ने मायावती के योगदान को याद करते हुए उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शुभकामना संदेश देते हुए लिखा कि बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती को जन्मदिन की हार्दिक बधाई। उन्होंने प्रभु श्रीराम से उनके दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी मायावती को शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ और दीर्घ जीवन की कामना की। वहीं. समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपने संदेश में मायावती की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि मायावती ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में शोषित, वंचित, उत्पीड़ित और उपेक्षित समाज के मान-सम्मान और अधिकारों के लिए संघर्ष किया। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि संविधान विरोधी ताकतों को जिस तरह मायावती ने चुनौती दी, वह संघर्ष आगे भी जारी रहे, यही कामना है। बसपा के लिए यह जन्मदिन संगठनात्मक दृष्टि से भी बेहद अहम रहा। पार्टी ने इसे ‘जनकल्याणकारी दिवस’ के रूप में मनाने का फैसला किया, जिसके तहत प्रदेश भर में मंडल स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। पार्टी मुख्यालय लखनऊ में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मायावती ने ब्लू बुक ‘मेरे संघर्षमय जीवन एवं बीएसपी मूवमेंट का सफरनामा’ भाग-21 और उसके अंग्रेजी संस्करण का विमोचन किया। यह पुस्तक बसपा आंदोलन और मायावती के राजनीतिक संघर्षों का दस्तावेज मानी जाती है। जन्मदिन के मौके पर मायावती ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज की सरकारें बसपा सरकार की योजनाओं के नाम बदलकर उन्हें चला रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जातिवादी पार्टियां लगातार बसपा को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन पार्टी इससे विचलित नहीं होगी। मायावती ने साफ कहा कि बसपा ने हमेशा सभी जातियों और धर्मों का सम्मान किया है और आगे भी करती रहेगी। उन्होंने ब्राह्मण समाज को लेकर भी बड़ा बयान दिया। मायावती ने कहा कि ब्राह्मणों को किसी का “चोखा-बाटी” नहीं चाहिए, बल्कि सम्मान चाहिए, और बसपा सरकार ने हमेशा उन्हें सम्मान दिया है। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, दलित और मुस्लिम सभी समाजों का बसपा सरकार में बराबर ध्यान रखा गया। 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर भी मायावती ने स्पष्ट संकेत दिए। उन्होंने कहा कि बसपा भविष्य में सभी चुनाव अकेले लड़ेगी। गठबंधन से पार्टी को नुकसान हुआ है और जब तक सभी वर्गों का भरोसा पूरी तरह बसपा पर नहीं बन जाता, तब तक किसी गठबंधन का सवाल नहीं है। उन्होंने ईवीएम और मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर भी सतर्क रहने की बात कही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 70वें जन्मदिन को इतने बड़े पैमाने पर मनाकर मायावती ने साफ कर दिया है कि बसपा अब पूरी ताकत के साथ 2027 की तैयारी में जुट चुकी है। जनकल्याणकारी दिवस के जरिए कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरने और संगठन को फिर से मजबूत करने की रणनीति साफ नजर आई। कुल मिलाकर, मायावती का 70वां जन्मदिन सिर्फ शुभकामनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह बसपा की आने वाली सियासी लड़ाई का औपचारिक आगाज भी बन गया।