:: आईसीएमआर के ‘फर्स्ट इन द वर्ल्ड चैलेंज’ में मिली बड़ी कामयाबी; 8 करोड़ के बजट से मेडिकल इमेजिंग का बदलेगा स्वरूप :: भोपाल/इंदौर (ईएमएस)। चिकित्सा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत ने एक ऐसी ऐतिहासिक छलांग लगाई है, जो वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर बदल देगी। एम्स भोपाल और आईआईटी इंदौर के विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम विश्व की पहली अगली पीढ़ी की एक्स-रे इमेजिंग प्रणाली विकसित करने जा रही है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और अल्ट्रा-लो रेडिएशन डोज़ पर आधारित यह तकनीक पारंपरिक सीटी स्कैन के समान सटीक परिणाम देगी, वह भी बिना किसी भारी-भरकम मशीनरी के। आईसीएमआर की प्रतिष्ठित योजना में चयन इस महत्वाकांक्षी परियोजना को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) की सर्वाधिक प्रतिष्ठित “फर्स्ट इन द वर्ल्ड चैलेंज–2025” योजना के तहत चुना गया है। यह भारत सरकार की एक दूरदर्शी पहल है, जो दुनिया में अपनी तरह के पहले बायोमेडिकल नवाचारों को बढ़ावा देती है। परियोजना के पूर्ण विकास के लिए 8 करोड़ रुपये का वित्तपोषण प्रदान किया गया है। यह उपलब्धि उन्नत स्वास्थ्य अनुसंधान में भारत की बढ़ती वैश्विक नेतृत्व क्षमता को रेखांकित करती है। :: किफायती और पोर्टेबल : सुदूर क्षेत्रों तक पहुँचेगी सुविधा :: इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता इसका पोर्टेबल और किफायती होना है। वर्तमान में सीटी स्कैन जैसी सुविधाएँ भारी निवेश और बड़े बुनियादी ढांचे की मांग करती हैं, जो केवल बड़े शहरों तक सीमित हैं। यह नई एक्स-रे प्रणाली इतनी सुलभ होगी कि इसे एम्बुलेंस, आपदा प्रतिक्रिया इकाइयों, छोटे क्लीनिकों और ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी स्थापित किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण मरीजों को गंभीर बीमारियों की जाँच के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा। :: 3डी विज़ुअलाइज़ेशन और लो-रेडिएशन का संगम :: यह तकनीक न केवल बीमारी की पहचान करेगी, बल्कि उपचार की योजना बनाने और शल्य-क्रिया (सर्जरी) के दौरान डॉक्टरों को रियल-टाइम त्रि-आयामी (3डी) मार्गदर्शन भी देगी। पारंपरिक सीटी स्कैन में रेडिएशन का खतरा अधिक होता है, लेकिन यह नई प्रणाली अल्ट्रा-लो रेडिएशन डोज़ तकनीक पर काम करती है, जो मरीजों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए कहीं अधिक सुरक्षित है। :: बहुविषयक विशेषज्ञों का दल :: इस ऐतिहासिक नवाचार का नेतृत्व एम्स भोपाल के प्रधान अन्वेषक डॉ. बी. एल. सोनी (ट्रॉमा एवं आपातकालीन चिकित्सा) कर रहे हैं। टीम में एम्स से डॉ. अंशुल राय, डॉ. सैकत दास, डॉ. सुदीप कुमार और आईआईटी इंदौर से डॉ. लोकेश बसवराजप्पा व डॉ. पुनीत गुप्ता जैसे दिग्गज विशेषज्ञ शामिल हैं। एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक प्रो. माधवानन्द कर ने इस सफलता को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में मील का पत्थर बताया है। :: तकनीक के क्रांतिकारी लाभ :: अल्ट्रा-लो रेडिएशन : पारंपरिक स्कैन के मुकाबले स्वास्थ्य के लिए न्यूनतम जोखिम। एआई इंटीग्रेशन : कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के जरिए तीव्र और त्रुटिरहित डायग्नोसिस। लाइव 3डी नेविगेशन : जटिल सर्जरी के दौरान चिकित्सकों को लाइव विज़ुअल्स मिलेंगे। भविष्य का विस्तार : फिलहाल इसे चेहरे और जबड़े (मैक्सिलोफेशियल) के लिए बनाया जा रहा है, जिसे बाद में पूरे शरीर के लिए लागू किया जाएगा। प्रकाश/15 जनवरी 2026