राष्ट्रीय
16-Jan-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। क्या आपने कभी ऐसी जगह की कल्पना की है, जहां सुबह तो होती है लेकिन सूरज नजर ही नहीं आता? जहां ऊंचे-ऊंचे पहाड़ सामने खड़े रहते हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी सिर्फ ठंडी हवा और रहस्यमयी सन्नाटे से ही महसूस की जा सकती है। चारों ओर फैली सफेद धुंध ऐसी लगती है मानो ज़मीन और आसमान के बीच कोई फासला ही न बचा हो। अरुणाचल प्रदेश में बसी अनिनी वैली ठीक ऐसी ही एक अनोखी और शांत घाटी है, जहां धुंधयुक्त सड़कें बादलों को चीरती हुई नजर आती हैं। पूर्वोत्तर भारत को देश के सबसे खूबसूरत इलाकों में गिना जाता है। आमतौर पर जब अरुणाचल प्रदेश की बात होती है तो तवांग और जीरो वैली का नाम सबसे पहले लिया जाता है, लेकिन इन्हीं मशहूर पर्यटन स्थलों से काफी दूर दिबांग जिले में स्थित अनिनी वैली आज भी भीड़भाड़ से दूर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती को संजोए हुए है। यह घाटी न केवल कुदरत का करिश्मा है, बल्कि दिबांग जिले का मुख्य केंद्र भी मानी जाती है। अनिनी वैली तक पहुंचने का सफर थोड़ा लंबा जरूर है, लेकिन उतना ही यादगार भी। राजधानी ईटानगर से यह करीब 570 किलोमीटर दूर है, जबकि असम के डिब्रूगढ़ से यहां तक लगभग 381 किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ता है। पहाड़ों के घुमावदार रास्ते, हर मोड़ पर बदलते नज़ारे और खिड़की से आती ठंडी हवा सफर की थकान को महसूस ही नहीं होने देती। इस घाटी की सबसे बड़ी खासियत इसकी कुदरती बनावट है। चारों ओर हिमालय की ऊंची, बर्फ से ढकी चोटियां, हरे-भरे घास के मैदान और पहाड़ों का सीना चीरते हुए बहते झरने इसे किसी पेंटिंग जैसा रूप देते हैं। यहां की धुंध मानो घाटी के साथ लुका-छिपी खेलती है। कभी पूरा इलाका सफेद चादर में छिप जाता है और पलभर में हवा का झोंका आते ही पूरा दृश्य खुलकर सामने आ जाता है। मौसम यहां अपने अलग ही रंग दिखाता है। गर्मियों में जब मैदानी इलाके झुलस रहे होते हैं, तब अनिनी की फिजाओं में ठंडक और सुकून घुला रहता है। वहीं सर्दियों में जब बर्फबारी होती है, तो पूरी घाटी किसी परीकथा की दुनिया जैसी लगने लगती है। दिबांग घाटी की गहराई, ड्री और मथुन नदियों की कलकल ध्वनि, अनिनी व्यू पॉइंट और मिश्मी हिल्स जैसी जगहें इस अनुभव को और खास बना देती हैं। सच कहें तो अनिनी वैली उन लोगों के लिए है, जो शोर से दूर जाकर प्रकृति की खामोशी में खुद को ढूंढना चाहते हैं। अगर आप भी नॉर्थ-ईस्ट की सैर का सपना देख रहे हैं, तो इस बादलों के ऊपर बसी घाटी को अपनी सूची में जरूर शामिल करें। हिदायत/ईएमएस 16 जनवरी 2026