नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ पर हमले बढ़ रहे हैं। पिछले पांच सालों में 149 हमलों में से केवल 33 में एफआईआर दर्ज हुई। 2021-22 में 14 मामले थे, जो 2024 में 49 और 2025 में 48 तक पहुंच गए। भीड़, संसाधनों की कमी और परिजनों का गुस्सा हिंसा का कारण बन रहा है। एफआईआर में देरी और प्रशासनिक दबाव के कारण हमलावर बेखौफ हैं, जिससे सुरक्षा एक बड़ा सवाल है। कई डाक्टर बताते हैं कि भीड़, संसाधनों की कमी और मरीजों के परिजनों का बढ़ता गुस्सा अक्सर हिंसा में बदल जाता है। बावजूद इसके, अधिकतर मामले अंदर ही अंदर निपटा दिए जाते हैं। डाक्टरों का कहना है कि एफआइआर दर्ज कराने में देरी, प्रशासनिक दबाव और कार्रवाई की अनिश्चितता के कारण हमलावर बेखौफ रहते हैं। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ ईएमएस/16/ जनवरी/2026