-इस हथियार का नाम है ‘पोसीडन’, यह फटा तो 1,650 फीट ऊंची सुनामी पैदा करेगा कीव,(ईएमएस)। रूस की ताकत दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। रूसी सेना में अब ‘समुंदर का राक्षस’ शामिल हो गया है, जो एक बटन दबते ही पूरे महाद्वीप को नक्शे से मिटाने की ताकत रखता है। ये हथियार रूस का ‘पोसीडन’ जिसे कई अलग-अलग तकनीक को एक साथ मिलाकर और पावरफुल बना दिया है। रूस का ये ब्रह्मास्त्र समुंदर में रेडिएक्टिव सुनामी ला सकता है यानी अगर भड़क जाए तो एक साथ कई शहर मिनटों में तबाहा कर सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक रूस ने सबसे पावरफुल और अलग तरह के परमाणु ड्रोन पोसीडन का सफल परीक्षण कर दुनिया को हिला दिया है। पुतिन ने खुद ऐलान किया है कि इसके जैसा हथियार न तो किसी के पास है और न ही इसे रोक पाने की टेक्नोलॉजी बना पाएगा। एक ऐसा ड्रोन जो पनडुब्बी की मदद से परमाणु ऊर्जा से चलता है और समंदर की गहराइयों में बिना किसी गड़बड़ी के और बिना रुके हजारों मील का सफर तय कर सकता है। रूस ने अपनी नई पनडुब्बी को इस घातक हथियार से लैस कर दिया है। अब ये ड्रोन सिर्फ हमला नहीं करेगा, बल्कि नए हथियार को एक्टिवेट करके समंदर के अंदर ही ‘कयामत’ ला सकता है। रूसी रणनीतिकारों का दावा है कि अगर इस पनडुब्बी से लैस पोसीडॉन को किसी देश के तट के पास फोड़ा गया, तो यह 1,650 फीट ऊंची रेडियोधर्मी सुनामी पैदा करेगा। यह लहरें सिर्फ पानी नहीं, बल्कि जहरीला रेडिएशन लेकर आएंगी, जो आने वाली कई नस्लों तक के लिए खतरा साबित होंगी। दावा किया जा रहा है कि एक झटके में बड़े-बड़े शहर समंदर के तल में हमेशा के लिए समा जाएंगे। बता दें पोसीडॉन को टाइटेनियम अलॉय से बनाया गया है, जिससे यह समंदर के उस हिस्से तक जा सकता है जहां आज तक कोई इंसान नहीं पहुंचा। इसकी रफ्तार 100 नॉट्स तक हो सकती है, जो इसे दुनिया के किसी भी टॉरपीडो से कई गुना तेज बनाती है। यह ड्रोन समंदर के नीचे इतनी धीमी आवाज में चलेगा कि दुश्मन के सोनार इस नहीं देख सकेंगे। जब तक दुश्मन को पता चलेगा, तब तक यह उसके बंदरगाह के नीचे फट चुका होगा। सबसे खास बात तो यह है कि रूस इसे सिर्फ पनडुब्बी से नहीं चलाएगा। ‘स्किफ’ तकनीक के जरिए रूस इन ड्रोन्स को समंदर की सतह पर किसी कंटेनर में छिपाकर महीनों तक छोड़ सकता है। यह समंदर के अंधेरे में चुपचाप पड़ा रहता है और जैसे ही ऊपर से कोई दुश्मन का जहाज गुजरता है या मॉस्को से सिग्नल मिलता है। इस ड्रोन के भीतर एक छोटा, गैस-कूल्ड परमाणु रिएक्टर लगा है। रूस ने पहली बार यह कारनामा कर दिखाया है कि इतने छोटे उपकरण में परमाणु ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सके। पुतिन कहना है ‘यह कुछ ऐसा है, जैसा दुनिया ने पहले कभी नहीं देखा होगा। सिराज/ईएमएस 18 जनवरी 2026