सुप्रीम कोर्ट ने सुनीं लोगों की दलीलें अब 28 को होगा फैसला मेनका गांधी पर क्यों गुस्सा हुआ सुप्रीम कोर्ट? नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई जारी है। जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ मामले की सुनवाई कर रही है। मंगलवार को सुनवाई के दौरान पशु कल्याण, आम नागरिकों की सुरक्षा और नगर निकायों की जिम्मेदारी को लेकर तीखी बहस हुई। एक ओर जहां पशु अधिकारों से जुड़े पक्ष ने कुत्तों को नसबंदी और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में छोड़ने की वकालत की, वहीं दूसरी ओर रिहायशी सोसायटियों, शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने की मांग उठी। देश के सार्वजनिक स्थलों पर आवारा कुत्तों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुन लीं। अब 28 जनवरी को इन दलीलों का जवाब और किए जा रहे उपायों पर चर्चा होगी। सुप्रीम कोर्ट में 28 जनवरी को दोपहर दो बजे आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन ने दलील दी कि समस्या का समाधान नए आश्रय स्थल बनाने में नहीं, बल्कि मौजूदा एबीसी (एनिमल बर्थ कंट्रोल) नियमों के प्रभावी और समयबद्ध क्रियान्वयन से होगा। उन्होंने कहा कि एनएपीआरई नीति ने रेबीज उन्मूलन में आने वाली नौ बड़ी बाधाओं की पहचान की है और सभी हितधारकों की भूमिका स्पष्ट की है, लेकिन कई राज्यों ने अब तक अपनी कार्ययोजना तैयार ही नहीं की। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने नसबंदी की प्रभावशीलता पर जोर देकर कहा कि कुछ शहरों में इससे आवारा कुत्तों की संख्या और आक्रामकता में कमी आई है। उन्होंने सुझाव दिया कि नसबंदी की पुष्टि के लिए कुत्तों का अल्ट्रासाउंड भी किया जा सकता है। इस पर जस्टिस संदीप मेहता ने व्यंग्यात्मक लहजे में टिप्पणी की, कि हम कुत्ते को प्रमाण पत्र ले जाने के लिए क्यों नहीं कह सकते?” इस टिप्पणी को लेकर बाद में यह बहस भी हुई कि अदालत की टिप्पणियों को मीडिया में किस तरह प्रस्तुत किया जाना चाहिए। वरिष्ठ वकील भूषण ने कहा कि कोर्ट की टिप्पणियों के कभी-कभी गंभीर सामाजिक परिणाम हो सकते हैं, इसलिए सतर्कता आवश्यक है। वहीं, पीठ ने स्पष्ट किया कि उसकी टिप्पणियां व्यंग्य नहीं बल्कि गंभीर चिंता को दिखाती हैं। राजू रामचंद्रन ने लाइव टेलीकास्ट के संदर्भ में कहा कि बार और बेंच दोनों की जिम्मेदारी है कि वे सावधानी बरतें। मेनका गांधी पर क्यों गुस्सा हुआ सुप्रीम कोर्ट? आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान मेनका गांधी की टिप्पणियों पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जाहिर की। पीठ ने कहा कि बयान अवमानना की श्रेणी में आते हैं, लेकिन फिलहाल अदालत ने उदारता दिखाते हुए कार्रवाई नहीं की। जस्टिस विक्रम नाथ सुनवाई के दौरान इतना गुस्सा हो गए कि उन्होंने कहा कि कसाब ने भी अदालत की अवमानना नहीं की थी पर आपके क्लाइंट ने की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता भारती त्यागी के वकील ने नीदरलैंड मॉडल का हवाला देकर सख्त पशु क्रूरता-विरोधी कानून, अनिवार्य माइक्रोचिपिंग और केंद्रीकृत कार्यक्रम की जरूरत पर जोर दिया। वहीं, प्रभावित नागरिकों ने आवारा कुत्तों से हो रही अशांति, नींद और बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहे असर को लेकर प्रशासन की निष्क्रियता पर चिंता जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले निजी पक्षों की दलीलें पूरी होंगी, उसके बाद राज्य सरकारों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाएगा। इस सुनवाई पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर भविष्य की नीतियों और आम नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ सकता है। आशीष दुबे / 20 जनवरी 2026