खेल
18-Jan-2026
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नई दिल्ली (ईएमएस)। भारतीय क्रिकेट के इतिहास में बापू नाडकर्णी का नाम अनुशासन, धैर्य और असाधारण नियंत्रण का पर्याय माना जाता है। अपनी कसी हुई गेंदबाजी के लिए प्रसिद्ध नाडकर्णी ने टेस्ट क्रिकेट में लगातार 21 मेडन ओवर फेंककर ऐसा रिकॉर्ड बनाया, जो आज भी गेंदबाजों के लिए आदर्श माना जाता है। उनका करियर इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधनों और साधारण पृष्ठभूमि के बावजूद मेहनत और संयम से विश्व स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। 4 अप्रैल 1933 को महाराष्ट्र के नासिक में जन्मे रमेशचंद्र गंगाराम नाडकर्णी ने 1951-52 में फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कदम रखा। घरेलू क्रिकेट में निरंतर प्रदर्शन के चलते उन्हें 1955 में भारतीय टेस्ट टीम में जगह मिली। 16 दिसंबर को न्यूजीलैंड के खिलाफ अपने पहले टेस्ट में उन्होंने पहली पारी में 68 रन की नाबाद पारी खेलकर प्रभावित किया और भारत ने वह मुकाबला ड्रॉ कराया। इसके बाद उन्होंने ऑलराउंड प्रदर्शन से टीम में अपनी उपयोगिता साबित की। 1960-61 में पाकिस्तान के खिलाफ ब्रैबोर्न स्टेडियम में उन्होंने चार विकेट लिए, जबकि दिल्ली टेस्ट में 63 रन बनाने के साथ पांच विकेट झटके। यह पूरी सीरीज ड्रॉ रही, लेकिन नाडकर्णी का योगदान बेहद अहम रहा। जनवरी 1964 में चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए टेस्ट में उन्होंने 32 ओवर में केवल पांच रन देकर 27 मेडन ओवर फेंके, जिनमें लगातार 21 मेडन ओवर शामिल थे। इस असाधारण स्पेल ने उन्हें दुनिया के सबसे किफायती गेंदबाजों की सूची में शीर्ष पर ला खड़ा किया। अक्टूबर 1964 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चेन्नई टेस्ट में उन्होंने कुल 11 विकेट लेकर अपनी गेंदबाजी का लोहा मनवाया। वहीं फरवरी 1964 में कानपुर में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 52 और 122 रन की नाबाद पारियां खेलकर अपनी बल्लेबाजी क्षमता भी साबित की। अंतरराष्ट्रीय करियर में नाडकर्णी ने 41 टेस्ट मैचों में 1,414 रन बनाए और 88 विकेट हासिल किए, जबकि उनकी इकॉनमी मात्र 1.67 रन प्रति ओवर रही। फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 191 मैचों में 8,880 रन और 500 विकेट लिए। 17 जनवरी 2020 को 86 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया, लेकिन उनका सादा जीवन, टीम भावना और खेल के प्रति ईमानदारी आज भी खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। डेविड/ईएमएस 18 जनवरी 2026