55 फीसदी हिंदू आबादी केरल में धार्मिक ध्रुवीकरण केरल में भाजपा की सरकार? तिरुवनंतपुरम (ईएमएस)। भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा पिछले कई वर्षों से केरल में धार्मिक धुर्वीकरण के प्रयास किये जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाएं केरल के हर हिस्से में लग रही है। जूना अखाड़ा के सहयोग से दक्षिण के पहले कुंभ का आयोजन होने जा रहा है। भरतपुझा नदी मैं कुंभ का आयोजन किया जा रहा है। चुनाव के ठीक 3 महीने पहले इस आयोजन को लेकर राजनीतिक एवं धार्मिक सरगर्मी शुरू हो गई है। जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज इस आयोजन के लिए मार्गदर्शन कर रहे हैं। फरवरी के प्रथम सप्ताह में अवधेशानंद गिरि महाराज इस कुंभ में उपस्थित रहेंगे। मल्लपुरम जिले में दक्षिण का पहला कुंभ केरल राज्य के मल्लपुरम जिले के तिरुनवाया कस्बे में यह आयोजन होने जा रहा है। यहां पर भगवान नव मुकुंद (विष्णु)मंदिर है। हर 12 साल में होने वाले मामाकंम उत्सव के लिए यह स्थल जाना जाता है। अब इसको कुंभ के रूप में मनाए जाने की शुरुआत हो रही है। 18 जनवरी से कुंभ की शुरुआत दक्षिण भारत का यह पहला कुंभ है। जो 18 जनवरी से शुरू होगा। उत्तर भारत के कुंभ की तरह यहां पर भी पेशवाई निकली जा रही है। पेशवाई की रथ यात्रा तमिलनाडु से शुरू होगी। 22 जनवरी को तिरूनावाया पहुंचेगी। इस रथ यात्रा में 12000 भक्तों के शामिल होने की संभावना जताई गई है। तमिलनाडु में भी विधानसभा चुनाव होना है। इसको ध्यान में रखते हुए दोनों राज्यों में इस कुंभ का फायदा मिले इसको ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। कुंभ के आयोजन के लिए बनारस से साधु संतों को भी बड़ी संख्या मे आमंत्रित किया गया है। ब्रह्मा जी का दूसरा मंदिर मंदिर के मुख्य पुजारी वासुदेव नंबूदिरी ने जानकारी देते हुए बताया है। 1300 साल पहले ब्रह्मा जी के मंदिर का निर्माण किया गया था। पुष्कर (राजस्थान) के बाद यह ब्रह्मा जी का दूसरा मंदिर है। 18 जनवरी को माघी अमावस्या पर कुंभ का पहला स्नान यहां पर होगा। इसके लिए नदी के दोनों तट पर लगभग 2 किलो मीटर का घाट स्नान के लिए बनाया गया है। स्नान सिर्फ दिन में संपन्न होंगे। घर फूलों से सजे कुंभ के आयोजन में जो श्रद्धालु यहां पर आएंगे। उनके रुकने और खाने-पीने की व्यवस्था स्थानीय लोगों के घरों में की गई है। मंदिर के आसपास 6 किलोमीटर के दायरे में 1500 घरों को अतिथियों के लिए तैयार किया गया है। उत्तर भारत में जिस तरह से कुंभ का आयोजन होता है। उसी तरह से दक्षिण भारत में प्रथम कुंभ का आयोजन होने जा रहा है। दक्षिण में तिरुनावाया की नील नदी यहां की पौराणिक नदी है। यह तमिलनाडु से शुरू होकर केरल में बहती है। 209 किलोमीटर लंबी केरल की सबसे बड़ी नदी है। कुंभ के दौरान काशी से आए हुए 12 ब्राह्मण रोज शाम को गंगा आरती की तरह नीला नदी में आरती का आयोजन करेंगे। कुंभ के दौरान यहां पर पितृ तर्पण की भी व्यवस्था की गई है। आयोजकों का कहना है, प्रतिदिन 50000 से ज्यादा लोग कुंभ में भाग लेने यहां पर आएंगे। 3 फरवरी को जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि महाराज, स्वामी चिदानंदपुरी, मां अमृतानंदमयी तथा केरल के राज्यपाल इस कुंभ के आयोजन में शामिल होंगे। आयोजन स्थल में भारी तैयारी पिछले 5 महीने से कुंभ की तैयारी चल रही है। तिरुनावाया, तिरुवनंतपुरम और कोच्चि आदि शहरों के सैकड़ो लोग यहां पर कुंभ के आयोजन की तैयारी कर रहे हैं। यह आयोजन लगभग 16 दिन चलेगा। इसमें प्रतिदिन 50000 से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। 25 एकड़ क्षेत्र में अन्नकूट और पार्किंग इत्यादि की व्यवस्था की गई है। यहां पर 20000 लोगों के लिए भोजन की व्यवस्था की जा रही है। 5000 वर्ग फीट जगह पर माघी अमावस्या के दिन पितृ तर्पण की विशेष व्यवस्था की जा रही है। धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति केरल में 3 महीने बाद विधानसभा के चुनाव होने जा रहे हैं। केरल में लगभग 55 फ़ीसदी आबादी हिंदू है। हिंदुओं को एकजुट करने के लिए दक्षिण के पहले कुंभ की शुरुआत होने जा रही है। हिंदुओं के बाद यहां पर मुसलमान और ईसाइयों की आबादी सबसे ज्यादा है। केरल की आबादी 3। 50 करोड़ के आसपास है। इसमें हिंदू आबादी लगभग 1.8 करोड़ से ज्यादा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में तीसरे नंबर पर भाजपा थी। उसके बाद से भाजपा और संघ यहां पर धार्मिक ध्रुवीकरण के माध्यम से हिंदुओं को एकजुट करने का संघ और भाजपा सुनयोजित प्रयास कर रहे हैं। भाजपा को 2021 में लगभग 12 फ़ीसदी वोट मिले थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में बदलाव हुआ, भाजपा और एनडीए के सहयोगी दलों को 19.4 फ़ीसदी वोट मिले। इससे भाजपा बहुत उत्साहित है। संघ के कार्यकर्ता पिछले 5 वर्षों से हिंदुओं को एकजुट करने के लिए हर सप्ताह हिंदू क्षेत्र में बैठकें ले रहे हैं। केरल में हिंदू वोटर की धार्मिक आस्था जगाने की सियासत के लिए कुंभ की आस्था को मुख्य केंद्र बिंदु बनाया जा रहा है। पिछले साल सितंबर माह में यहां पर अंतरराष्ट्रीय अय्यप्पा सम्मेलन का आयोजन किया गया था। हाल ही में नगरीय चुनाव में तिरुअनंतपुर सीट में भाजपा का मेयर निर्वाचित हुआ है। इससे भाजपा में उत्साह बढ़ा हुआ है। भाजपा का लक्ष्य है, इस बार केरल में भाजपा की सरकार बने। केंद्र में भाजपा की सरकार है। ऐसी स्थिति में अभी नहीं तो कभी नहीं की तर्ज पर हिंदू संगठनों ने अपनी पूरी ताकत कुंभ में लगा दी है। कुंभ के तुरंत बाद चुनाव की तैयारी शुरू हो जाएगी। केरल में धार्मिक ध्रुवीकरण के माध्यम से पहली बार भाजपा सरकार बनाने के लिए चुनाव लड़ने जा रही है। हिंदू संगठनों द्वारा यह कहा जा रहा है 259 साल पहले कुंभ की परंपरा बंद हो गई थी उसे पुर्नजागृत किया जा रहा है। एसजे/ 18 जनवरी /2026