राज्य
20-Jan-2026


- एमपी हाईकोर्ट ने अफगानी युवक की याचिका खारिज की, कहा भोपाल (ईएमएस)। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने अफगानी युवक की एक याचिका को खारिज कर दिया है। युवक ने वीजा नियमों के उल्लंघन और अवैध ठहराव के आरोप में भारत से लीव इंडिया नोटिस को चुनौती देने के लिए याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि बिना वीजा भारत में रहने का कोई हक नहीं है। युवक का नाम सैयद राशिद है। वह 2019 में वीजा पर भारत आया था और भोपाल के एक निजी विश्वविद्यालय में रहकर एमए की पढ़ाई कर रहा था। कोरोना काल और महामारी के कारण उसे वीजा विस्तार मिला और 2022 में उसने कोर्स पूरा भी कर लिया। इसके साथ ही सैयद राशिद ने छात्र वीजा रहते हुए विश्वविद्यालय में नौकरी भी शुरू कर दी, जबकि उसका रोजगार वीजा कभी स्वीकृत नहीं हुआ था। सरकार ने पहले दिया था वीजा विस्तार सरकार ने सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए अफगानी युवक का वीजा 24 मार्च 2024 तक बढ़ाया, लेकिन उसके बाद भी याचिकाकर्ता भारत में बना रहा। तालिबान के अफगानिस्तान में सत्ता में आने के बाद उसे यूएनएचसीआर से शरणार्थी का दर्जा मिला। इस बीच, भोपाल के डिप्टी कमिश्नर ने 8 जनवरी 2025 को आवेदक को लीव इंडिया नोटिस भेजकर एफआईआर दर्ज कराई, जिसे अफगानी युवक ने चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। सुनवाई के दौरान शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता सुमित रघुवंशी ने दलीलें पेश कीं। वीजा अवधि समाप्त होने के बाद रहना कानून विरुद्ध जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि यूएनएचसीआर से शरणार्थी का दर्जा मिलना भारतीय वीजा कानून से छूट नहीं देता और बिना वैध वीजा भारत में रहने का कोई अधिकार नहीं बनता। अदालत ने लीव इंडिया नोटिस को बरकरार रखते हुए याचिका पर दखल देने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि वीजा अवधि समाप्त होने के बाद भारत में रुकना विदेशी अधिनियम 1946 की धारा 14 का उल्लंघन है। ऐसे में प्रशासन द्वारा जारी लीव इंडिया नोटिस और एफआईआर की कार्रवाई पूरी तरह वैध है। विनोद / 20 जनवरी 26