* श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय, वेरावल में 18वाँ दीक्षांत समारोह संपन्न, 902 विद्यार्थियों को डिग्रियाँ व 31 पदक प्रदान गिर सोमनाथ (ईएमएस)| गिर सोमनाथ जिले के मुख्यालय वेरावल स्थित श्री सोमनाथ संस्कृत विश्वविद्यालय का 18वाँ दीक्षांत समारोह राजेन्द्रभुवन रोड पर स्थित विश्वविद्यालय परिसर में कुलाधिपति एवं राज्यपाल आचार्य देवव्रत की अध्यक्षता में आयोजित हुआ। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि आज पूरा विश्व भोगवाद और भौतिक संसाधनों की खोज में लगा है, जबकि भारतीय अध्यात्म और ज्ञान परंपरा ने सदियों पहले ही आत्मा के माध्यम से ईश्वर-प्राप्ति का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि हमें जो इतिहास पढ़ाया गया है, वह बाहरी लोगों द्वारा लिखा गया है। हमारे ऋषि-मुनियों ने भारत की प्राचीन संस्कृति और मूल्यों का जैसा वर्णन किया है, उसे जीवन में उतारने की आज अत्यंत आवश्यकता है। इतिहास को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया, जिसके कारण आज माता-पिता अपने बच्चों के विदेश जाकर पढ़ने पर गर्व करते हैं, जबकि एक समय ऐसा था जब विश्व के लोग भारत में ज्ञान प्राप्त करने आते थे। इसी कारण भारत को ‘विश्वगुरु’ कहा जाता था। राज्यपाल ने बताया कि प्राचीन भारत 22 प्रकार की विद्याओं में पारंगत था। महर्षि चरक, सुश्रुत जैसे ऋषियों द्वारा अर्जित ज्ञान को आज का आधुनिक विज्ञान भी पूरी तरह स्पर्श नहीं कर पाया है। यह समस्त ज्ञान वेद-उपनिषदों से प्राप्त हुआ है और संस्कृत भाषा में निहित है। उन्होंने कहा कि भोगवाद साधन है, साध्य नहीं; यह मार्ग है, मंज़िल नहीं। भारत ने विश्व को भौतिकवाद नहीं, बल्कि आध्यात्मिक चिंतन दिया है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ और ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ईंट-पत्थर का नहीं, बल्कि विचार और अध्यात्म का देश है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकास के साथ-साथ विरासत को सहेजने का कार्य कर रहे हैं और वेरावल में संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुकांतकुमार सेनापति ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का विवरण देते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने वाले छात्रों का निर्माण किया जा रहा है। वेरावल के नागरिक भी संस्कृत बोलें, इसके लिए ‘संस्कृत संभाषण वर्गों’ के माध्यम से निरंतर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इस अवसर पर अक्षरधाम स्वामीनारायण शोध संस्थान, दिल्ली के निदेशक महामहोपाध्याय प्रो. भद्रेशदास स्वामी ने वैदिक संस्कृति और शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। समारोह में 25 स्वर्ण पदक और 6 रजत पदक सहित कुल 31 पदक प्रदान किए गए। 18वें दीक्षांत समारोह में 363 शास्त्री (बी.ए.), 20 शास्त्री-शिक्षाशास्त्री (बी.ए.-बी.एड.), 246 आचार्य (एम.ए.), 208 पीजीडीसीए, 54 शिक्षाशास्त्री (बी.एड.) और 11 विद्यावारिधि (पीएच.डी.) सहित कुल 902 डिग्रियाँ प्रदान की गईं। इसके अलावा, गोकुलकृष्ण ट्रस्ट, जूनागढ़ के सहयोग से गुजरात के संस्कृत विद्वान हरिप्रसाद यादवराय बोबडे को ‘सरस्वतीबेन जयंतिलाल भट्ट संस्कृत विद्वान-2026 पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया। शोधार्थी गणेश हेगड़े को ‘शोधविभूषणम्’ श्रेष्ठ पीएच.डी. शोध प्रबंध पुरस्कार प्रदान किया गया। समारोह में राज्यपाल एवं अतिथियों के करकमलों से तीन ग्रंथों का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में गुजरात राज्य संस्कृत बोर्ड, विश्वविद्यालय प्रशासन, साधु-संत, विद्वान, विद्यार्थी और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सतीश/20 जनवरी