राष्ट्रीय
22-Jan-2026


पटना, (ईएमएस)। गणतंत्र दिवस समारोह में रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित भारत पर्व के अंतर्गत राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की चयनित झांकियों का प्रदर्शन लाल किला, नई दिल्ली में किया जाएगा। बिहार की झांकी को भी भारत पर्व में शामिल किया गया है। दरअसल भारत पर्व के तहत देश की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक विविधताओं को झांकियों, हस्तशिल्प, खानपान और परंपराओं के माध्यम से आम जनता के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। इस वर्ष भारत पर्व में बिहार की झांकी का विषय है- “मखाना: लोकल से ग्लोबल की थाली में सुपरफूड”। बिहार का सफेद सोना यानी मखाना आज मिथिलांचल के पोखर से निकलकर सुपरफूड पहचान के साथ दुनिया की थाली में परोसा जा रहा है। यह लोकल हुनर का ग्लोबल चेहरा है। मखाना, जिसे फॉक्स नट या कमल बीज भी कहा जाता है, मिथिलांचल के तालाबों से निकलकर आज वैश्विक पहचान प्राप्त कर चुका है। भारत दुनिया की कुल मखाना आपूर्ति का अधिकांश हिस्सा देता है, जिसमें बिहार की हिस्सेदारी लगभग 85-90 प्रतिशत है। मिथिला मखाना को वर्ष 2022 में जीआई टैग भी प्राप्त हुआ है, जिसने इसे वैश्विक बाजार में विशिष्ट पहचान दी है। झांकी की दृश्य संरचना में झांकी दो भागों में मखाना की पूरी यात्रा को दर्शाती हैI कमल के पत्तों के बीच उभरा सफेद “लावा मखाना”, आगे जीआई टैग का प्रतीक और किनारों पर मिथिला पेंटिंग की बॉर्डर। दूसरे खंड में मखाना की कटाई, बीज संग्रह, ग्रेडिंग, भुनाई, फोड़ाई, पैकिंग और क्वालिटी चेक की पूरी प्रक्रिया। एक ओर मिट्टी के चूल्हे पर लोहे की कढ़ाही में मखाना भूनती महिला, दूसरी ओर लकड़ी के मूसल से फोड़ता पुरुष—यह दृश्य पारंपरिक श्रम, महिला सहभागिता और स्थानीय कौशल को जीवंत रूप में प्रस्तुत करता है। यह झांकी यह संदेश देती है कि मखाना केवल एक कृषि उत्पाद नहीं, बल्कि यह विरासत, श्रम, महिला भागीदारी और उद्यमिता का संगम है, जो बिहार को सीधे वैश्विक बाजारों से जोड़ता है। संतोष झा- २२ जनवरी/२०२६/ईएमएस