राष्ट्रीय
22-Jan-2026
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कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी शुरू, वहीं भाजपा विधायकों ने भारत माता की जय के नारे लगाए बेंगलुरु,(ईएमएस)। बेंगलुरु में कर्नाटक विधानसभा के संयुक्त सत्र के दौरान एक अभूतपूर्व संवैधानिक और राजनीतिक विवाद सामने आया, जब राज्य के राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा तैयार पारंपरिक अभिभाषण को पढ़ने से इंकार किया। राज्यपाल गहलोत ने अभिभाषण की केवल दो-तीन पंक्तियाँ पढ़ीं और अचानक ‘जय हिंद’ व ‘जय कर्नाटक’ के नारे के साथ अपना संबोधन समाप्त कर सदन से बाहर चले गए। राज्यपाल गहलोत के इस कदम से सदन में भ्रम और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। राज्यपाल ने अपने दो लाइन के संबोधन में कहा कि कर्नाटक सरकार सामाजिक, आर्थिक और शारीरिक विकास सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन उन्होंने सरकार द्वारा तैयार पूरा भाषण नहीं पढ़ा। जैसे ही वे सदन से बाहर निकले, कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जबकि भाजपा विधायकों ने राज्यपाल का समर्थन कर भारत माता की जय’ के नारे लगाए। इसके पहले दिन में अटकलें थीं कि राज्यपाल संयुक्त सत्र में शामिल नहीं होंगे, लेकिन वे तय समय पर विधानसभा पहुंचे और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर और विधान परिषद के अध्यक्ष बसवराज होरट्टी भी मौजूद थे। घटना के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने राज्यपाल के कदम की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद 176 और 163 का उल्लंघन किया है, जिनके अनुसार राज्यपाल को मंत्रिपरिषद की सलाह के अनुसार सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण पढ़ना होता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जनप्रतिनिधियों के सदन का अपमान है और उनकी सरकार इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट जाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। दरअसल, विवाद की जड़ राज्यपाल द्वारा भाषण के 11 पैराग्राफ हटाने की मांग थी, जिनमें केंद्र सरकार की नीतियों और ‘विकसित भारत’ जैसे कार्यक्रमों पर टिप्पणी थी। इस घटनाक्रम से कर्नाटक में राज्यपाल और निर्वाचित सरकार के बीच टकराव और गहराने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और अधिक गरमाने की संभावना है। स्थिति उस समय काफी तनावपूर्ण हो गई जब कांग्रेस विधायक और एमएलसी राज्यपाल को रोकने की कोशिश करते हुए उनसे सरकार द्वारा तैयार पूरा भाषण पढ़ने को कहने लगे। कांग्रेस एमएलसी बी.के. हरिप्रसाद ने गुस्से में राज्यपाल से सवाल करने की कोशिश की। हालात को काबू में रखने के लिए मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने विधायकों को हटाकर राज्यपाल के बाहर जाने का रास्ता साफ किया। इस दौरान हरिप्रसाद ने मार्शलों का विरोध भी किया, जिसके चलते कुछ समय तक सदन में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। इससे पहले दिन में इस बात को लेकर अटकलें थीं कि राज्यपाल संयुक्त सत्र में शामिल नहीं होने वाले हैं, लेकिन तय समय पर वह विधान सभा पहुंचे। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। इस मौके पर विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर और विधान परिषद के अध्यक्ष बसवराज होरट्टी भी मौजूद थे। आशीष दुबे / 22 जनवरी 2026