कहा -‘देश के बहुआयामी विकास को नई दिशा दे रहे युवा और महिलाएं’ नई दिल्ली (ईएमएस)। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन देश के लोकतांत्रिक मूल्यों, सांस्कृतिक एकता और महिला सशक्तिकरण की उपलब्धियों से भरा रहा। अपने प्रेरक संदेश में उन्होंने कहा कि भारत का युवा वर्ग और महिलाएं मिलकर देश के बहुआयामी विकास को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि गणतंत्र दिवस हमें अतीत, वर्तमान और भविष्य को एक सूत्र में जोड़ने का अवसर देता है। 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारत ने अपनी राष्ट्रीय नियति स्वयं तय की और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ एक सशक्त लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में अपनी पहचान स्थापित की। उन्होंने संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता को भारत की एकता और लोकतंत्र की मजबूत नींव बताया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती और उससे जुड़े आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे अवसर राष्ट्रीय एकता की भावना को और प्रबल बनाते हैं। उन्होंने भारत की उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक फैली प्राचीन सांस्कृतिक एकता को लोकतंत्र की जीवंत शक्ति बताया। राष्ट्रपति मुर्मू ने ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने का भी उल्लेख किया और कहा कि यह गीत जन-जन में राष्ट्रप्रेम की भावना जगाता है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस राष्ट्रगीत को सुब्रमण्य भारती और श्री अरबिंदो जैसे महान विचारकों ने अलग-अलग भाषाओं में व्यापक स्वरूप देकर पूरे देश को जोड़ा। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती और ‘पराक्रम दिवस’ का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ‘जय हिंद’ का उद्घोष आज भी देशवासियों, विशेषकर युवाओं, को साहस और देशभक्ति की प्रेरणा देता है। महिला सशक्तिकरण पर जोर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिला सशक्तिकरण को देश के सर्वांगीण विकास का अहम स्तम्भ बताया। उन्होंने कहा कि देश की बहनें और बेटियां परंपरागत सीमाओं को तोड़कर खेती-किसानी से लेकर अंतरिक्ष, स्व-रोजगार से लेकर सुरक्षा बलों और खेल जगत तक हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। दस करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं ने विकास की नई तस्वीर पेश की है। खेलों में महिलाओं की उपलब्धियों की सराहना करते हुए राष्ट्रपति ने महिला क्रिकेट और शतरंज में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बेटियों की ऐतिहासिक सफलताओं को गर्व का विषय बताया। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। अब खेती-किसानी से लेकर अंतरिक्ष अनुसंधान तक, स्व-रोजगार से लेकर सुरक्षा बलों तक हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं।