लेख
27-Jan-2026
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आज पर्यवारण पर ध्यान देना बहुत जरुरी है नहीं तो बीमारी को निमंत्रण देंगें,पर्यावरण शब्द का निर्माण दो शब्दो से मिलकर बना है – “परि” और “आवरण” अर्थात वह आवरण जो हमें चारों और से घेरे हुआ है उसे पर्यावरण कहते है. हर साल 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. यह दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वाराराजनैतिकऔर सामाजिक जाग्रति लाने के लिये घोषित किया गया है. सबसे पहला पर्यावरण दिवस 5 जून 1973 को मनाया गया था.पर्यावरण मेजैविक जैसे कि जीवाणु, कीड़े मकोड़े, पेड़ पौधों से लेकर हमसभी इंसान शामिल है. जबकि अजैविक तत्वों में निर्जीव तत्व जैसे पर्वत, चट्टानें नदी आदि शामिल हैं.मनुष्य द्वारा की जाने वाली सारी क्रियाएँ पर्यावरण को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं.विज्ञान के क्षेत्र मे असीमित प्रगति का असर पर्यावरण पर पड़ा है. आज मानव विज्ञान के क्षेत्र में नये-नये आविष्कार कर रहा है. लेकिन इन आविष्कारों के कारण वह प्रकृति पर पूर्णतया विजय प्राप्त करना चाहता है. इस कारण प्रकृति का संतुलन बिगड़ रहा है. धरती पर जनसंख्या वृद्धि का असर भी पर्यावरण पर रहा है.औद्योगीकरण तथा शहरीकरण की तीवृ गतिप्रकृति के हरे भरे क्षेत्रों को समाप्त कर रही है. हमारी प्रथ्वी पर पेड़-पौधे, हवा, पानी है तो हम है.आज इंसान प्रथ्वी पर बहुत ज्यादा अन्याय कर रहा है. दुनिया कंक्रीट की होती जा रही है. पेड़-पौधे काटे जा रहें हैं. जिसके कारणवर्षा कम हो गयी है, सूखा पड़ रहा है. आजधरती पर सबसे बड़ी समस्या जल की है. आज हमें बारिश के पानी को संग्रहित करने की आवश्यकता है. इसके लिये हमें बड़े स्तर पर तालाब, पोखर बनाने की जरुरत है. आजकल वाटर मेंनेजमेंट को लेकर कई संस्थान बहुत सारे कोर्सेस चला रहें हैं. जिसमे वाटर साइंटिस्ट, वाटर मेंनेजर, हाइड्रो जियोलाजिस्ट, बायोलाजिस्ट, वाटर कंजरबेशनिस्ट आदि बनाने के मौके बढ़ गए हैं.आज प्रदूषण के कारण सारी धरती प्रदूषित हो रही है और ऐसा ही रहा तो मानव सभ्यता का अंत निश्चित है. पर्यावरण प्रदूषण के बहुत से दुष्प्रभाव है जो अत्यंत घातक है; जैसे परमाणु विस्फोटो से वायुमंडल का तापमान बढ़ना, ओज़ोन परत का क्षतिज होना, मृदा क्षरण आदि. पर्यावरण सरंक्षण को ध्यान में रखते हुए 1992 मे ब्राज़ील में एक ‘पृथ्वी सम्मेलन’ आयोजित किया गया जिसमे विश्व के 174 देशों ने हिस्सा लिया. इसके बाद सन 2002 में जोहान्सवर्ग में प्रथ्वी सम्मेलन आयोजित किया गया. जिसमें पर्यावरण सरंक्षण पर अनेक उपाय सुझाए गए.हमें अपने पर्यावरण को बेहतर बनाना चाहिए, इसके लिए सबसे पहले हमें जल को बचाना पड़ेगा. फैक्ट्रियों का गंदा पानी नदियों में न जाये इसका विशेष ध्यान रखना पड़ेगा. कारखानों का गंदा पानी सीवर लाइन के गंदे पानी को नदियों में जाने से रोकना होगा, जिससे की हम इंसान और समस्त प्राणीजगत गंदे पानी से होने वाली बीमारियों से बच सकें. प्रदूषित पानी को हम अपनी खेती में न डालें.हमें अपने बच्चों को पर्यावरण सुरक्षा पर समुचित ज्ञान समय-समय पर देते रहना चाहिए. उनको पर्यावरण के बारे में जानकारी दे.जल प्रदूषण के साथ-साथ वायु प्रदूषण ने भी हमारे पर्यावरण को बहुत हानिपहुंचाई हैं. बड़े-बड़े कारखानों की चिमनियों से निकले गंदे धुए, ए.सी. इनवर्टर, जैनरेटर आदि से निकली कार्बन डाइआक्साइड, नाइट्रोजन आदि गैसे वायुमंडल में घुलती रहती है. जिससे की हमारा वायुमंडल प्रदूषित होता रहता है.ध्वनि प्रदूषण भी पर्यावरण को प्रदूषित करता है. बच्चे के जन्म की खुशी, शादी पार्टी आदि में डी.जे. आवश्यक हो गया है इन सभी ध्वनि प्रदूषण से भी हमारी धरती प्रदूषित हो रही है.आज समूचा विश्व जलसंकट की समस्या से गुजर रहा है. आज हमें जल को संग्रहित करने के लिये बड़े स्तर पर वाटर हारवेस्टिंग, कंजबेशन और मेंनेजमेंट पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है. जिससे कि पानी को हम संग्रहित कर सकें तथा संग्रहित किया गया जल हमारी खेती के काम आ सके.हमने जो धरती से लिया है वह धरती को वापस करना पड़ेगा अगर नहीं किया तो धरती पर असंतुलन पैदा हो जायेगा। (यह लेखक के व्य‎‎‎क्तिगत ‎विचार हैं इससे संपादक का सहमत होना अ‎निवार्य नहीं है) .../ 27 जनवरी /2026