लखनऊ (ईएमएस)। बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव को समाप्त करने के लिए बनाए गए नए नियमों का समर्थन किया है। उन्होंने इक्विटी कमेटी (समता समिति) के गठन का विरोध करने वालों पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे संकीर्ण मानसिकता का परिचायक बताया है। मायावती ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि देश के सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव के निराकरण हेतु यूजीसी द्वारा लाए गए नए नियमों का कुछ लोग विरोध कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य वर्ग के केवल वे ही लोग इसका विरोध कर रहे हैं जो जातिवादी मानसिकता से ग्रसित हैं और इसे अपने विरुद्ध एक षड्यंत्र मान रहे हैं, जो पूरी तरह अनुचित है। हालांकि, बसपा सुप्रीमो ने सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील नियमों को लागू करने से पहले यदि सभी पक्षों को विश्वास में लिया जाता, तो देश में सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने सरकारों और संस्थानों को सलाह दी कि भविष्य में इस तरह के कदम उठाते समय सामाजिक सामंजस्य का ध्यान रखा जाना चाहिए। मायावती ने दलित और पिछड़ा वर्ग के छात्रों व नागरिकों को भी सतर्क रहने की नसीहत दी। उन्होंने अपील की कि इन वर्गों के लोगों को अपने ही समाज के स्वार्थी और बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों में नहीं आना चाहिए, जो अपनी राजनीति चमकाने के लिए ऐसे मुद्दों का सहारा लेते हैं। गौरतलब है कि यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को नए दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसके तहत एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी दलों की स्थापना अनिवार्य कर दी गई है। इन नियमों को लेकर उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध के स्वर भी उठ रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/28जनवरी2026