30-Jan-2026
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नई दिल्ली,(ईएमएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी इजरायल दौरे की चर्चाओं के बीच फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन आगा शाहीन नई दिल्ली की महत्वपूर्ण यात्रा पर हैं। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारत और फिलिस्तीन के बीच दशकों पुराने ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित करते हुए पश्चिम एशिया में भारत की संतुलित और निष्पक्ष भूमिका की जमकर सराहना की। शाहीन ने विश्वास जताया कि भारत, इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष को समाप्त करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने में एक बेहद प्रभावशाली मध्यस्थ की भूमिका निभा सकता है। फिलिस्तीनी विदेश मंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत के इजरायल और फिलिस्तीन, दोनों ही देशों के साथ प्रगाढ़ और सम्मानजनक संबंध हैं। इसी विशिष्ट स्थिति के कारण भारत कब्जे और हिंसा को खत्म करने में मदद करने की क्षमता रखता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून, दो-राष्ट्र समाधान और न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन के प्रति भारत के स्पष्ट और अडिग रुख की प्रशंसा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में फिलिस्तीन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक व्यापक मान्यता मिलेगी, जिसमें भारत का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। अपनी पहली भारत यात्रा पर खुशी जाहिर करते हुए वारसेन आगा शाहीन ने भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और एक बेहद सम्मानित राष्ट्र बताया। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन के लोग भारत को एक ऐसे महान राष्ट्र के रूप में देखते हैं, जो सदैव उनके अधिकारों और संघर्षों के साथ खड़ा रहा है। उन्होंने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास और वहां की जनता की ओर से भारत के लिए शुभकामनाएं भी साझा कीं। भारत-फिलिस्तीन संबंधों के ऐतिहासिक पहलुओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि यह रिश्ता 1930 के दशक से चला आ रहा है। उन्होंने वर्ष 1947 में फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत के अटूट समर्थन और महात्मा गांधी द्वारा फिलिस्तीन के विभाजन के विरोध को भी याद किया। उनके अनुसार, भारत ने हमेशा फिलिस्तीनी जनता के आत्मनिर्णय के अधिकार और मानवाधिकारों का वैश्विक मंचों पर समर्थन किया है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत के रणनीतिक हितों को स्वीकार करते हुए अघाबेकियन ने कहा कि भारत की यह क्षमता ही उसे विशेष बनाती है कि वह दोनों पक्षों के साथ संवाद बनाए रखते हुए एक न्यायपूर्ण समाधान की ओर कदम बढ़ा सकता है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भारत की यह सक्रियता न केवल फिलिस्तीन के लिए बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में स्थिरता लाने के लिए निर्णायक साबित होगी। वीरेंद्र/ईएमएस/30जनवरी2026