- सौर और पवन ऊर्जा में प्रथम पंक्ति में गुजरात, देश की कुल नवीकरणीय क्षमता में 16.5 प्रतिशत योगदान - खावड़ा में विश्व का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क, लाखों रोजगार और हरित भविष्य की ओर मजबूत कदम गांधीनगर (ईएमएस)| प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन प्राप्त करने का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है और परंपरागत ईंधन पर निर्भरता में कमी लाने के लिए महत्वपूर्ण पहलें की हैं। इस व्यापक आयोजन का उद्देश्य वर्ष 2030 तक भारत की 50 प्रतिशत बिजली नवीकरणीय ऊर्जा से प्राप्त करना है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में गुजरात ने नवीकरणीय ऊर्जा में नए मानदंड स्थापित किए हैं, जो इस राष्ट्रीय लक्ष्य में उल्लेखनीय योगदान देते हैं। दिसंबर-2025 तक के आँकड़े दर्शाते हैं कि देश में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में गुजरात का योगदान सर्वाधिक है। राज्य की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 42.583 गीगावाट तक पहुँची है, जो भारत की कुल क्षमता में 16.50 प्रतिशत का योगदान दर्शाती है। इसके अतिरिक्त; गुजरात कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता (42.583 गीगावाट) में प्रथम स्थान पर है तथा स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता (14,820.94 मेगावाट) में भी प्रथम स्थान पर है और सौर ऊर्जा क्षमता (25,529.40 मेगावाट) में दूसरे स्थान पर है। सोलर रूफटॉप इन्स्टॉलेशन में गुजरात देश में प्रथम स्थान पर है, जिसमें 11 लाख सोलर रूफटॉप सिस्टम्स के माध्यम से 6,412.80 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन हो रहा है। सौर ऊर्जा में गुजरात अग्रसर दिसंबर-2025 तक 25,529.40 मेगावाट स्थापित क्षमता के साथ सौर ऊर्जा क्षेत्र में गुजरात अग्रसर रहा है। इसमें ग्राउंड माउंटेड प्रोजेक्ट्स से 17,771.21 मेगावाट, सोलर रूफटॉप सिस्टम्स से 6,412.80 मेगावाट (जिसमें सूर्य गुजरात द्वारा 2,073.65 मेगावाट, पीएम सूर्य घर योजना द्वारा 1,913 मेगावाट तथा अन्य 2,267.04 मेगावाट), हाइब्रिड परियोजनाओं से 1,172.38 मेगावाट तथा ऑफ-ग्रिड सिस्टम्स (पीएम कुसुम सहित) से 173.01 मेगावाट बिजली उत्पादन हो रहा है। गुजरात में सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए चारणका (749 मेगावाट), राधानेसडा (700 मेगावाट) और धोलेरा (300 मेगावाट) में सोलर पार्क कार्यरत हैं। 37.35 गीगावाट की उत्पादन क्षमता के साथ कच्छ के खावडा में विश्व का सबसे बड़ा रिन्यूएबल एनर्जी पार्क विकसित हो रहा है, जिसमें हाल में 11.33 गीगावाट उत्पादन प्राप्त करने में सफलता मिली है। गुजरात ने 11 लाख से अधिक रूफटॉप सोलर सिस्टम्स स्थापित करने की उपलब्धि भी हासिल की है; जो आवासीय, वाणिज्यिक एवं औद्योगिक क्षेत्रों में 6,412.80 मेगावाट बिजली का उत्पादन करते हैं। गुजरात ने वर्ष 2016 से घरों में छत पर सौर ऊर्जा पैनल स्थापित करने के लिए प्रोत्साहन दिया है और पीएम सूर्य घर योजना के लॉन्च होने तक उसे समर्थन मिला है। इसके कारण भारत के कुल रूफटॉप सोलर इन्स्टॉलेशन में राज्य का योगदान 25 प्रतिशत से अधिक हुआ है। कृषि क्षेत्र में पीएम कुसुम के घटक बी के अंतर्गत 12,700 स्टैंडअलोन ऑफ-ग्रिड सोलर वॉटर पंप स्थापित किए गए हैं, जिनके द्वारा 89.54 मेगावाट ऊर्जा उत्पादन हो रहा है। 14,820.94 मेगावाट उत्पादन के साथ पवन ऊर्जा में गुजरात अग्रसर भारत में पवन ऊर्जा क्षेत्र में गुजरात ने प्रथम पवन ऊर्जा नीति लागू करके महत्वपूर्ण योगदान दिया है। दिसंबर-2025 तक पवन ऊर्जा क्षेत्र में राज्य की स्थापित क्षमता 14,820.64 मेगावाट है, जिसमें कच्छ का योगदान सर्वाधिक 7,476.73 मेगावाट है। जामनगर (1,867.65 मेगावाट), देवभूमि द्वारका (1,281.26 मेगावाट), अमरेली (973.85 मेगावाट), राजकोट (874.90 मेगावाट), भावनगर (618.80 मेगावाट), मोरबी (568.6 मेगावाट), सुरेन्द्रनगर (456.6 मेगावाट) तथा पाटण (208.2 मेगावाट) जिलों में भी पवन ऊर्जा की उल्लेखनीय स्थापित क्षमता है। राज्य ने 2018 में हाइब्रिड पॉलिसी तथा रिन्यूएबल एनर्जी (आरई) पॉलिसी 2023 अंतर्गत पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं द्वारा 2,398.77 मेगावाट उत्पादन क्षमता जोड़ी है। 80 प्रतिशत से अधिक टर्बाइन सरकार द्वारा आवंटित भूमि पर कार्यरत हैं, जहाँ सुदृढ़ ढाँचागत सुविधाएँ तथा अनुकूल प्रणालियाँ विकसित की गई हैं। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के कारण अनुमानित 2.37 लाख प्रत्यक्ष तथा परोक्ष रोजगार का सृजन हुआ है। परियोजनाओं के तेज क्रियान्वयन एवं ग्रिड कनेक्टिविटी के लिए राज्य सरकार ने अक्षय ऊर्जा सेतु ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से सुव्यवस्थित तथा पारदर्शी प्रणाली विकसित की है। नेट मीटरिंग नियमों के तहत राज्य ने 6.40 जीडब्लूपी से अधिक रूफटॉप सोलर क्षमता स्थापित की है, जो इसे इस क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाती है। गुजरात की मजबूत नीतियों से ऊर्जा क्षेत्र का विकास 1993 में प्रथम पवन ऊर्जा नीति लागू करने के बाद गुजरात सरकार ने समय-समय पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण नीतियाँ लागू की हैं; जिनमें सौर ऊर्जा नीतियाँ (2009, 2015, 2021), वेस्ट टू एनर्जी एंड स्मॉल हाइडल पॉलिसी (2016) और विंड-सोलर हाइब्रिड पॉलिसी (2018) शामिल हैं। 2022 में अपडेटेड वेस्ट टू एनर्जी नीति तथा गुजरात रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी-2023 द्वारा सोलर, विंड, हाइब्रिड तथा वितरण आधारित प्रोजेक्ट्स के लिए एकीकृत ढाँचा मुहैया कराया गया है। इस नीति के अंतर्गत क्षमता सीमा समाप्त की गई है तथा टैरिफ, ग्रिड चार्ज, ऊर्जा लेखा, क्रॉस सब्सिडी एवं बैंकिंग चार्ज के बारे में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं। इसके अतिरिक्त; गुजरात डिस्ट्रीब्यूटेड रिन्यूएबल एनर्जी बाइलेटरल प्रोक्योरमेंट (डीआरईबीपी) योजना क्लीन एनर्जी में अग्रणी राज्य के रूप में गुजरात की स्थिति को मजबूत बनाती है। तो 2025 की रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी विशाल क्षमता तथा वितरित नवीकरणीय ऊर्जा को तेज गति देने पर केन्द्रित है। इसमें ऑन-डिमांड कनेक्टिविटी, फ्लेक्सिबल कमीशनिंग समयसीमा, पुराने विंड प्रोजेक्ट्स की रीपावरिंग तथा सोलर, पवन एवं हाइब्रिड सिस्टम्स के साथ बैटरी स्टोरेज का आसान समन्वय सुनिश्चित किया गया है। यह नीति उभरती नवीकरणीय ऊर्जा टेक्नोलॉजीस, निजी क्षेत्र की भागीदारी, आरई मैन्युफैक्चरिंग व रिसाइक्लिंग तथा अक्षय-ऊर्जा-सेतु पोर्टल द्वारा डिजिटल सुविधाओं के माध्यम से नवीनता को प्रोत्साहन देती है। भविष्य के लिए गुजरात सज्ज : 2030 तक 105 गीगावाट उत्पादन का लक्ष्य गुजरात अपनी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं का निरंतर विस्तार कर रहा है और हाल में 5,203 परियोजनाएँ चल रही हैं। इन परियोजनाओं में 4,992 सौर ऊर्जा परियोजनाएँ (32.22 गीगावाट), 72 पवन ऊर्जा परियोजनाएँ (15 गीगावाट) तथा 139 हाइब्रिड एनर्जी परियोजनाएँ (21.15 गीगावाट) शामिल हैं। इनसे 68.37 गीगावाट ऊर्जा प्राप्त होगी। गांधीनगर में आयोजित आरई इन्वेस्ट 2024 कार्यक्रम में राज्य ने वर्ष 2030 तक 105 गीगावाट उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जो भारत के 500 गीगावाट अजीवाश्म ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य में 20 प्रतिशत योगदान देगा। सतीश/31 जनवरी