-सीबीआई की अंतिम चार्जशीट ने कई परतें खोली, आरोपों का सच आया सामने नेल्लोर,(ईएमएस)। तिरुपति में मंदिर, प्रसाद और पवित्रता तीनों एक साथ चर्चा के केंद्र में आ गए। आरोप लगे कि लड्डू बनाने में इस्तेमाल होने वाले घी में बीफ या सूअर की चर्बी मिलाई गई है। बहस तेज हुई, सियासत गरमाई और लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। भक्तों के मन में डर बैठ गया। सवाल एक ही था क्या तिरुपति जैसे पवित्र स्थान पर आस्था के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है? इसी बेचैनी के बीच सीबीआई की जांच शुरू हुई और अब चार्जशीट सामने आ चुकी है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई की अंतिम चार्जशीट ने कई परतें खोली हैं। आरोपों का सच सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक साफ शब्दों में कहा गया है कि तिरुपति लड्डू में न तो बीफ टैलो था और न ही सूअर की चर्बी, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। जांच बताती है कि घी शुद्ध भी नहीं था। असली दूध से बना घी नहीं बल्कि केमिकल और वेजिटेबल ऑयल से तैयार ‘सिंथेटिक’ घी इस्तेमाल किया गया था यानी आस्था पर चोट हुई, लेकिन जिस तरह का डर दिखाया गया वह सही नहीं था। सच इससे ज्यादा चौंकाने वाला है। सीबीआई ने 23 जनवरी को कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। इसमें बताया गया कि 2019 से 2024 के बीच तिरुमला तिरुपति देवस्थानम को सप्लाई किया गया घी जानवरों की चर्बी से नहीं बना था। जांच में पाया गया कि घी में वेजिटेबल ऑयल और लैब में तैयार किए गए एस्टर्स मिलाए गए थे ताकि यह शुद्ध देसी घी जैसा दिखे और टेस्ट में पास हो जाए। सीबीआई के मुताबिक बीफ टैलो या लार्ड की मौजूदगी का कोई सबूत नहीं मिला। सीबीआई जांच में सबसे बड़ा खुलासा सप्लाई चेन को लेकर हुआ। उत्तराखंड के भगवानपुर स्थित भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी को मुख्य सप्लायर बताया गया। जांच में सामने आया कि इस डेयरी ने 2019 से 2024 के बीच न तो दूध खरीदा और न ही मक्खन बनाया। इसके बावजूद टीटीडी को करीब 68 किलो ‘घी’ सप्लाई किया गया। इस घी की कुल कीमत करीब 250 करोड़ रुपए आंकी गई। जांच एजेंसी ने इसे ‘वर्चुअल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट’ करार दिया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कैसे टीटीडी की क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम को धोखा दिया गया। घी की शुद्धता जांचने के लिए राइशर्ट-मैसल वैल्यू देखी जाती है। इसे बढ़ाने के लिए पाम ऑयल, पाम कर्नेल ऑयल और पामोलिन का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद दिल्ली के एक सप्लायर से लिए गए एसीटिक एसिड एस्टर्स मिलाए गए, ताकि टेस्ट में घी शुद्ध लगे। रंग के लिए बीटा कैरोटीन और खुशबू के लिए आर्टिफिशियल फ्लेवर डाला गया। इस मामले में कुल 36 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें टीटीडी के पूर्व जीएम, डेयरी के डायरेक्टर और अन्य बिचौलिये शामिल हैं। चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। अब कोर्ट में ट्रायल चलेगा और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई तय होगी। सीबीआई रिपोर्ट ने एक डर को खत्म किया लेकिन कई सवाल छोड़ दिए। बीफ या सूअर की चर्बी नहीं थी, यह राहत की बात है, लेकिन सिंथेटिक घी का इस्तेमाल आस्था के साथ धोखा है।