राष्ट्रीय
31-Jan-2026
...


* गुजरात का पांचवां और कच्छ का पहला अंतरराष्ट्रीय महत्व वाला वेटलैंड घोषित, जैव विविधता और इको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा अहमदाबाद (ईएमएस)| बन्नी के रतन ‘छारी-ढंढ’ पक्षी अभयारण्य को आधिकारिक रूप से ‘रामसर साइट’ घोषित किया गया है, इससे कच्छ के गौरव को चार चांद लग गए हैं। छारी-ढंढ गुजरात का पांचवां और कच्छ का पहला अंतरराष्ट्रीय महत्व वाला वेटलैंड (आर्द्रभूमि) बन गया है। गुजरात के लिए गर्व की बात है कि कच्छ जिले में स्थित छारी ढंढ पक्षी अभयारण्य को अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले रामसर स्थलों की सूची में शामिल किया गया है। इसके साथ ही गुजरात में रामसर स्थलों की संख्या अब बढ़कर पांच हो गई है। इस संबंध में अधिक जानकारी देते हुए वन एवं पर्यावरण मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि छारी-ढंढ पक्षी अभयारण्य को रामसर साइट का दर्जा मिलने से पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, स्थानीय विकास और वैश्विक पहचान जैसे क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव आएगा। मोढवाडिया ने कहा कि गुजरात वेटलैंड के संरक्षण और संवर्धन में सदैव अग्रसर रहा है। देश के कुल वेटलैंड क्षेत्रफल में गुजरात का हिस्सा 21 फीसदी है, जो अन्य राज्यों की तुलना में सबसे अधिक है। गुजरात के वेटलैंड लगभग 3.5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हैं, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 17.8 फीसदी है। मंत्री मोढवाडिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और वेटलैंड संवर्धन के लिए लगातार प्रयासरत है। राज्य में मरीन नेशनल पार्क (समुद्री राष्ट्रीय उद्यान) और अभयारण्य, खिजड़िया अभयारण्य, नल सरोवर अभयारण्य, छारी ढंढ, कच्छ का छोटा रण-घुड़खर अभयारण्य और पोरबंदर पक्षी अभयारण्य जैसे अनेक वेटलैंड आधारित संरक्षित क्षेत्र हैं। गांधीनगर स्थित गिर फाउंडेशन गुजरात में वेटलैंड इकोसिस्टम की स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए वैज्ञानिक शोध, निगरानी कार्यक्रम और वेटलैंड शोध एवं दस्तावेजीकरण में सक्रिय रूप से शामिल है। उन्होंने कहा कि कच्छ के इको-टूरिज्म और पर्यावरण संरक्षण क्षेत्र में आज एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। एशिया का सबसे बड़ा घास का मैदान माने जाने वाले बन्नी क्षेत्र के छोर पर स्थित ‘छारी-ढंढ’ कंजर्वेशन रिजर्व को आधिकारिक रूप से अंतरराष्ट्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वेटलैंड साइट यानी ‘रामसर साइट’ घोषित किया गया है। नल सरोवर, थोळ, खिजड़िया और वढवाणा के बाद अब ‘छारी-ढंढ’ गुजरात का पांचवां और कच्छ का पहला रामसर स्थल बन गया है। अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि छारी-ढंढ पक्षी अभयारण्य को रामसर साइट के रूप में अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलना गुजरात के लिए गर्व की बात है। इससे राज्य के पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों वैश्विक स्तर पर पहचान मिली है। इस मान्यता से छारी-ढंढ वेटलैंड का दीर्घकालिन संरक्षण सुनिश्चित होगा, प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल मजबूत बनेगा और दुर्लभ एवं लुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा, रामसर साइट का दर्जा मिलने से क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा, जिसके परिणामस्वरूप स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार और आय के नए अवसर खुलेंगे। पर्यावरण जागरूकता, शैक्षणिक गतिविधियों और समुदाय की सहभागिता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री प्रवीण माली ने कहा कि गुजरात में नल सरोवर, थोळ, खिजड़िया और वढवाणा पक्षी अभयारण्य को पहले ही रामसर साइट की मान्यता मिल चुकी है। अब, छारी-ढंढ पक्षी अभयारण्य के इस सूची में शामिल होने से राज्य की पर्यावरण संरक्षण और वेटलैंड संवर्धन की प्रतिबद्धता और मजबूत होगी। राष्ट्रीय स्तर की बात करें, तो भारत में राष्ट्रीय दृष्टि से महत्वपूर्ण कुल 115 वेटलैंड में से 8 वेटलैंड गुजरात में हैं। राज्य मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए सभी गुजरातियों को बधाई देते हुए कहा कि इसके अलावा, राज्य में 19 ऐसे वेटलैंड हैं, जो महत्वपूर्ण पक्षी और जैव विविधता वाले क्षेत्र के रूप में जाने जाते हैं, जो प्रवासी एवं स्थानीय पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण आश्रय स्थल मुहैया कराते हैं। उल्लेखनीय है कि आज केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 2 फरवरी, 2026 को ‘विश्व वेटलैंड दिवस’ से पहले उत्तर प्रदेश में पटना पक्षी अभयारण्य और गुजरात के छारी-ढंढ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने से भारत के रामसर नेटवर्क में दो नए वेटलैंड को शामिल करने की घोषणा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का रामसर नेटवर्क 2014 में 26 स्थलों से बढ़कर वर्तमान में 98 स्थल हो गया है, जो 276 फीसदी से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता पर्यावरण संरक्षण और वेटलैंड संरक्षण के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। नाम की सार्थकता और भौगोलिक महत्व कच्छी भाषा में ‘छारी’ का अर्थ क्षार वाली और ‘ढंढ’ यानी उथला सरोवर। लगभग 227 वर्ग किलोमीटर (22,700 हेक्टेयर) क्षेत्र में फैला यह वेटलैंड रण और घास के मैदान के बीच एक अद्भुत पर्यावास (प्राकृतिक आवास) है। इसे वर्ष 2008 में गुजरात का पहला ‘कंजर्वेशन रिजर्व’ घोषित किया गया था। पक्षियों और वन्यजीवों का स्वर्ग छारी-ढंढ में पक्षियों की 250 से अधिक प्रजातियां दर्ज की गई हैं। सर्दियों के दौरान यहां साइबेरिया, मध्य एशिया और यूरोप के 25,000 से 40,000 तक कॉमन क्रेन (कुंज), वेनेलस ग्रेगेरियस (संघी टिटहरी) और डालमेटियन पेलिकन स्थानांतरण करके आते हैं। इसके अतिरिक्त, लेसर फ्लेमिंगो, ग्रेटर फ्लेमिंगो और सारस भी यहां दिखाई देते हैं। इतना ही नहीं, यहां लुप्तप्राय डालमेशियन पेलिकन, ओरिएंटल डार्टर, ब्लेक-नेक्ड स्टॉर्क और अनेक शिकारी पक्षी भी दिखाई देते हैं। केवल पक्षी ही नहीं, बल्कि यह क्षेत्र चिंकारा, रेगिस्तानी लोमड़ी (डेजर्ट फॉक्स), स्याहगोश (केरेकल), रेगिस्तानी लोमड़ी और भेड़िये जैसे अनेक वन्यजीवों का भी महत्वपूर्ण आश्रय स्थल है। प्रशासन की उपलब्धि इस अंतरराष्ट्रीय मान्यता को प्राप्त करने में गुजरात के चीफ वाइल्ड लाइफ वॉर्डन डॉ. जयपाल सिंह, गांधीनगर वन्य प्राणी विंग की टीम, मुख्य वन संरक्षक (कच्छ फॉरेस्ट सर्कल, भुज) तथा उप वन संरक्षक कच्छ (पश्चिम) वन विभाग भुज के लगातार प्रयास और कार्य निर्णायक रहे हैं। यह उपलब्धि राज्य एवं केंद्र सरकार (वेटलैंड डिवीजन) के निरंतर मार्गदर्शन में वेटलैंड संरक्षण और इसकी जैव विविधता को बनाए रखने के लिए किए गए वैज्ञानिक प्रयासों के परिणामस्वरूप हासिल हुई है। पर्यटन एवं संरक्षण पर सकारात्मक प्रभाव रामसर साइट का दर्जा मिलने से छारी-ढंढ को अब वैश्विक स्तर पर प्रसिद्धि मिलेगी, जिससे कच्छ में इको-टूरिज्म का विकास होगा और स्थानीय रोजगार के अवसर के नए द्वार खुलेंगे। इसके साथ ही, इस क्षेत्र के संरक्षण के लिए अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार फंड और तकनीकी सहायता मिलने का रास्ता भी साफ होगा। वन विभाग कच्छ की इस अमूल्य विरासत को संरक्षित रखने एवं पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए कटिबद्ध है। सतीश/31 जनवरी