नई दिल्ली (ईएमएस)। वर्तमान में बेटियां जीवन के हर क्षेत्र में मजबूती से आगे बढ़ रही हैं, लेकिन उनके सफर में कई शारीरिक और मानसिक चुनौतियां भी आती हैं। इन्हीं चुनौतियों में से एक है पीरियड्स के दौरान होने वाला दर्द, ऐंठन और असहजता, जो कई बार उनकी पढ़ाई, काम और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित कर देती है। ऐसे समय में योग एक सुरक्षित, प्रभावी और प्राकृतिक उपाय के रूप में सामने आता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार पीरियड्स के दौरान हल्के और आरामदायक योगासन करने से दर्द, सूजन, थकान और मूड स्विंग्स में काफी राहत मिल सकती है। योग करने से शरीर में एंडोर्फिन हार्मोन का स्राव बढ़ता है, जिसे प्राकृतिक पेनकिलर माना जाता है। इससे दर्द कम होता है और मानसिक तनाव भी घटता है। साथ ही योगासन पेल्विक क्षेत्र में रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं, जिससे मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं और ऐंठन में कमी आती है। विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि इन दिनों भारी या तेज व्यायाम से बचना चाहिए और केवल सौम्य योगासन ही करने चाहिए। पीरियड्स के दौरान बालासन यानी चाइल्ड पोज बहुत फायदेमंद माना जाता है। इस आसन में घुटनों के बल बैठकर आगे की ओर झुकते हैं और माथा जमीन पर टिकाया जाता है। इससे कमर और पेट की मांसपेशियों को आराम मिलता है, सूजन घटती है और मन शांत होता है। इसी तरह सुप्त बद्ध कोणासन, जिसे रीक्लाइनिंग बटरफ्लाई पोज भी कहा जाता है, पेल्विक क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ाने में मदद करता है और ऐंठन से राहत देता है। अपानासन भी पीरियड्स के दर्द में तुरंत आराम देने वाला आसन है। पीठ के बल लेटकर घुटनों को छाती से लगाने से पेट की मरोड़, गैस और सूजन कम होती है। वहीं मार्जरीआसन-बितिलासन यानी कैट-काउ पोज रीढ़ को लचीला बनाता है और कमर दर्द में राहत देता है। सांस के साथ तालमेल बनाकर यह आसन करने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और मूड स्विंग्स भी नियंत्रित होते हैं। सुप्त मत्स्येंद्रासन पेट और कमर की जकड़न को दूर करने में मदद करता है और दर्द को कम करता है। योगासन को नियमित दिनचर्या में शामिल करने से पीरियड्स से जुड़ी परेशानियों पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। सुदामा/ईएमएस 01 फरवरी 2026