जोधपुर(ईएमएस)। राजस्थान के जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। एक आश्रम की शांति के बीच हुई इस अनहोनी ने कई ऐसे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब अब पुलिस की विशेष जांच टीम तलाश रही है। हालांकि शुरुआती दौर में इसे सामान्य मृत्यु के नजरिए से देखा जा रहा था, लेकिन परिजनों के दावों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों ने मामले को पूरी तरह संदिग्ध बना दिया है। जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश के अनुसार, मौत की तह तक जाने के लिए एसआईटी का गठन कर दिया गया है। फिलहाल पुलिस को विसरा और विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही वैज्ञानिक रूप से मौत के कारणों की पुष्टि हो सकेगी। इस मामले में सबसे गहरा संदेह उस नर्सिंग कर्मी (कंपाउंडर) देवी सिंह राजपुरोहित पर है, जिसने मौत से ठीक पहले साध्वी को इंजेक्शन लगाए थे। जानकारी के अनुसार, देवी सिंह साध्वी के पिता वीरम नाथ का परिचित था और वह जोधपुर के एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत था। अस्पताल स्टाफ के पास उसके पिछले रिकॉर्ड की ज्यादा जानकारी नहीं है। इस पूरी घटना में शनिवार को एक बड़ा खुलासा तब हुआ जब एसआईटी ने आश्रम में मौजूद युवक सुरेश से पूछताछ की। सुरेश वह शख्स है जो साध्वी के अंतिम समय में उनके सबसे करीब था। सुरेश के बयान रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। उसने बताया कि मंगलवार रात साध्वी अजमेर से लौटी थीं। बुधवार सुबह उनका गला कुछ खराब था, जिसके लिए उन्होंने गरारे किए और दोपहर में जुकाम की वजह से काढ़ा भी पिया था। शाम करीब 5:00 बजे साध्वी ने सुरेश को फोन कर गेट खोलने को कहा क्योंकि डॉक्टर आने वाला था। सुरेश के मुताबिक, नर्सिंग कर्मी देवी सिंह कमरे में गया और संभवतः एक या दो इंजेक्शन लगाए। उसके जाने के महज चार-पांच मिनट बाद ही साध्वी की एक जोरदार चीख सुनाई दी। जब तक सुरेश कमरे से बाहर आता, साध्वी निढाल होकर मुख्य द्वार के पास गिर चुकी थीं। आनन-फानन में उन्हें गाड़ी में डालकर अस्पताल ले जाया गया। सुरेश ने बताया कि रास्ते में साध्वी की सांसें उखड़ रही थीं और उन्होंने अंतिम शब्द कहे थे, पापा, मुझे न्याय दिला देना। सुरेश ने यह भी गौर किया कि उस वक्त साध्वी के नाखून हरे पड़ रहे थे, जो शरीर में किसी जहरीले तत्व या संक्रमण के अचानक फैलने का संकेत हो सकता है। निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद पिता ने शव को अपने ही वाहन से ले जाने पर जोर दिया। इस बीच, पुलिस इंजेक्शन के प्रकार और उन रसायनों की जांच कर रही है जो साध्वी के शरीर में प्रवेश कराए गए थे। क्या यह गलत दवा का मामला है या इसके पीछे कोई गहरी साजिश, यह तो जांच के बाद ही साफ होगा। फिलहाल, न्याय की वह आखिरी पुकार जोधपुर की हवाओं में तैर रही है और साध्वी के समर्थक दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग कर रहे हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/01फरवरी2026