नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 प्रस्तुत किया। इन बजट प्रस्तावों का उद्देश्य प्रत्यक्ष करों में दंड और अभियोजन को युक्तिसंगत बनाना है। वित्त मंत्री ने एक सामान्य आदेश के माध्यम से कर-निर्धारण और दंड कार्यवाहियों को एकीकृत करने का प्रस्ताव रखा जिससे प्रक्रियाओं के दोहराव से बचा जा सके। अपील की प्रक्रिया के निष्कर्ष पर ध्यान दिए बिना प्रथम अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष अपील की अवधि के लिए दंड राशि के संबंध में करदाता पर कोई ब्याज देयता नहीं होगी। इसके अतिरिक्त पूर्व भुगतान 20 प्रतिशत से कम करके 10 प्रतिशत की जा रही है और इसकी गणना मुख्य कर मांग पर होगी। वित्त मंत्री ने मुकदमेबाजी को कम करने के लिए एक अतिरिक्त उपाय के रूप में करदाता को संगत वर्ष के लिए लागू दर के अतिरिक्त 10 प्रतिशत कर दर के साथ विवरणी को पुनर्निधारण कार्यवाहियों के पश्चात भी अपडेट करने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा है। कर-निर्धारण अधिकारी उसके बाद अपनी कार्यवाहियों में केवल इस अपडेट विवरणी का उपयोग करेंगे। कम कर की सूचना देने के मामलों में दंड और अभियोजन से सुरक्षा हेतु एक फ्रेमवर्क पहले से मौजूद है। वित्त मंत्री ने सुरक्षा के इन फ्रेमवर्क को गलत सूचना देने के संबंध में लागू करने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि ऐसे मामलों में करदाता को देय कर और ब्याज के अलावा अतिरिक्त आयकर के रूप में कर राशि के 100 प्रतिशत का भुगतान करना अपेक्षित होगा। खातों के लेखापरीक्षा न कराने के मामलों में, अंतरण मूल्य निर्धारण लेखापरीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत न करने तथा वित्तीय लेन-देन के मामलों में विवरण प्रस्तुत करने में चूक जैसी तकनीकी गलतियों के लिए दंडों को शुल्क में परिवर्तित करने का प्रस्ताव है। वित्त मंत्री ने कुछ गंभीर अपराधों के रोकने के संबंध में सावधानीपूर्वक संतुलन बनाते हुए आयकर अधिनियम के अंतर्गत अभियोजन ढांचे को युक्तिसंगत बनाने का प्रस्ताव रखा है। लेखा बही खातों और दस्तावेजों को प्रस्तुत न करने तथा वस्तु रूप में भुगतान के मामले में टीडीएस का भुगतान न करना अब अपराध की श्रेणी से बाहर होगा। इसके अतिरिक्त छोटे अपराधों के लिए अब केवल जुर्माना लगाया जाएगा। अन्य अभियोजनों को अपराध के अनुसार अनुपात में श्रेणीबद्ध किया जाएगा। इसका परिणाम अधिकतम कारावास को कम करके दो वर्ष करते हुए केवल साधारण कारावास होगा जिसमें न्यायालयों को इन्हें जुर्माने में परिवर्तित करने की शक्तियां होंगी। पुराने प्रभाव के साथ 01.10.2024 से 20 लाख रुपये से कम के सकल मूल्य वाली अचल विदेशी परिसंपत्ति को घोषित न किए जाने पर फिलहाल कोई दंड नहीं है। ऐसे मामलों में अभियोजन से सुरक्षा देते हुए इसे लागू किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। डेविड/ईएमएस 01 फरवरी 2026