राष्ट्रीय
01-Feb-2026
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दही शुभता और समृद्धि का प्रतीक रहा है, यह धार्मिक व स्वास्थ्य संबंधी मायनों में खास नई दिल्ली,(ईएमएस)। देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश कर रही हैं, लेकिन इस बार उनकी शुरुआत कुछ अलग अंदाज में हुई। बजट पेश करने से पहले उन्हें राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने दही खिला कर रवाना किया। आप सोच रहे होंगे, आखिर क्यों दही? क्या ये कोई नई परंपरा है या फिर निजी पसंद का मामला? दरअसल, हमारे समाज में दही सिर्फ स्वाद का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह धार्मिक, सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी कई मायनों में खास माना जाता है। दही हमेशा से शुभता और समृद्धि का प्रतीक रहा है। जैसा कि हर छोटे बच्चे को बचपन में सिखाया जाता है, सफाई, शुद्धता और मीठास यही गुण दही में होते हैं। वित्त मंत्री का दही खाना केवल सांकेतिक नहीं है, यह हमारे सांस्कृतिक रीति-रिवाज और परंपराओं को संसद के मंच तक जोड़ने का एक अनोखा तरीका है। दही का उल्लेख वेदों और पुराणों में भी मिलता है। इसे पवित्र माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले दही खाने की परम्परा सदियों पुरानी है। दही से जुड़ी मान्यता है कि मीठा दही खाने से शुरू करने जा रहे काम के शुभ फल प्राप्त होते हैं। इतना ही नहीं त्योहारों में दही का प्रयोग करना आम बात है जैसे कि पोंगल, गोवर्धन पूजा, या होली के समय। हमारे बुजुर्ग हमेशा कहते हैं, दही खाने से मन और शरीर दोनों शुद्ध होते हैं। यह सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश भी देता है साथ मिलकर खाने और खुशी बांटने का। किसी भी जरूरी काम, इंटरव्यू या यात्रा पर जाने से पहले दही-चीनी खाना सफलता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। जानकारी के मुताबिक दही को गणेशजी और लक्ष्मीजी का भोग माना जाता है, इसलिए इसे सौभाग्य और सकारात्मकता लाने वाला समझा जाता है। ज्योतिष में दही का संबंध चंद्रमा से बताया गया है, जो मानसिक शांति और शीतलता प्रदान करता है। पूजा-पाठ और विशेष अवसरों पर दही को पंचामृत में शामिल किया जाता है, जो स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ शुद्धता भी प्रदान करता है। माना जाता है कि दही खाने से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और मन शांत रहता है। दही न सिर्फ आध्यात्मिक बल्कि शारीरिक लाभ भी देता है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स भरपूर होते हैं। हर सुबह एक कटोरी दही खाने से पाचन बेहतर होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यही कारण है कि वित्त मंत्री जैसी व्यस्त दिनचर्या वाली शख्सियत भी इसे प्राथमिकता देती हैं। निर्मला सीतारमण के इस कदम ने सिर्फ संसद में ही नहीं, सोशल मीडिया पर भी हलचल मचा दी। लोग दही और बजट के इस अनोखे मेल पर चर्चा कर रहे हैं। यह दिखाता है कि परंपरा और आधुनिक राजनीति एक साथ चल सकती हैं। देश के लिए आर्थिक फैसले जितने जरूरी हैं, उतना ही हमारे रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक संकेतों का सम्मान करना भी। दही का महत्व सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं है, यह हमारी पहचान, हमारी संस्कृति और हमारी सोच को दर्शाता है। बजट के पहले दही खाना एक छोटे, लेकिन प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा जा सकता है जो समाज, स्वास्थ्य और परंपरा को जोड़ता है। सिराज/ईएमएस 01फरवरी26