01-Feb-2026
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ढाका(ईएमएस)। दक्षिण एशियाई देशों में लगातार हो रही भूकंपीय हलचल ने चिंता बढ़ा दी है। रविवार तड़के करीब 4:00 बजे बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के आंकड़ों के अनुसार, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.0 दर्ज की गई। हालांकि रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता कम थी और इसे एक हल्का झटका माना जा रहा है, लेकिन इसने स्थानीय निवासियों के बीच दहशत पैदा कर दी। लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए। विशेषज्ञों का मानना है कि ये छोटे झटके किसी बड़ी आपदा का संकेत हो सकते हैं क्योंकि बांग्लादेश अपनी भौगोलिक बनावट के कारण एक बड़े विनाशकारी भूकंप के मुहाने पर खड़ा है। एनसीएस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस भूकंप का केंद्र जमीन से 20 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। इसकी सटीक भौगोलिक स्थिति 24.85 उत्तरी अक्षांश और 92.07 पूर्वी देशांतर पर दर्ज की गई। गौरतलब है कि यह क्षेत्र पिछले कुछ समय से काफी सक्रिय बना हुआ है। इससे ठीक एक दिन पहले शनिवार तड़के अफगानिस्तान में भी 4.0 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसका केंद्र 40 किलोमीटर की गहराई में था। क्षेत्र में बार-बार आ रहे ये झटके टेक्टोनिक प्लेटों में हो रही हलचल की ओर इशारा कर रहे हैं। भू-गर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार, बांग्लादेश दुनिया के सबसे संवेदनशील भूकंपीय क्षेत्रों में से एक है। इसकी मुख्य वजह इसका तीन प्रमुख सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों के जंक्शन पर स्थित होना है। इसमें इंडियन प्लेट उत्तर-पूर्व की ओर करीब 6 सेमी प्रति वर्ष और यूरेशियन प्लेट उत्तर की ओर लगभग 2 सेमी प्रति वर्ष की गति से खिसक रही है। साथ ही बर्मा प्लेट का दबाव इस पूरे क्षेत्र को और अधिक अस्थिर बना देता है। इन प्लेटों के आपसी टकराव और निरंतर बढ़ते दबाव के कारण बांग्लादेश को 13 अलग-अलग भूकंपीय क्षेत्रों में विभाजित किया गया है। राजधानी ढाका की स्थिति विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। प्रति वर्ग किलोमीटर 30,000 से अधिक लोगों की आबादी के साथ ढाका दुनिया के सबसे घने शहरों में गिना जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका को दुनिया के 20 सबसे अधिक भूकंप-संवेदनशील शहरों की सूची में रखा गया है। इसके अलावा चटगांव हिल ट्रैक्ट्स और सिलहट के जैंतियापुर जैसे इलाके हाइयेस्ट रिस्क यानी सर्वाधिक जोखिम वाली श्रेणी में आते हैं। देश के पास से गुजरने वाली बोगुरा, त्रिपुरा, शिलांग पठार और असम जैसी फाल्ट लाइन्स कभी भी बड़ी तबाही का कारण बन सकती हैं। दिसंबर 2025 में महसूस किए गए तेज झटकों के बाद अब विशेषज्ञों ने स्पष्ट कर दिया है कि केवल जागरूकता और आधुनिक तकनीक ही बचाव का रास्ता हैं। पुरानी इमारतों का सुरक्षा ऑडिट और नए निर्माणों में भूकंप-रोधी नियमों का कड़ाई से पालन करना अब समय की मांग बन चुका है। वीरेंद्र/ईएमएस/01फरवरी2026