क्षेत्रीय
01-Feb-2026
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झाबुआ (ईएमएस) धन को ही अपना सब कुछ मान लेने वाले देशवासियों को महात्मा गांधी ने मन की ताकत से रुबरु कराया, किंतु सत्ता ओर धन के मद में हम उस मन की ताकत से दूर हो गए, उसे नहीं समझ पाए, यही हमारे जीवन की सबसे बड़ी क्षति साबित हुई। उक्त विचार लोकतंत्र सैनानी, चिंतक और लेखक अनिल त्रिवेदी द्वारा व्यक्त किए गए। वे जिले के थांदला में आज रविवार को कन्हैयालाल वैद्य स्मृति व्याख्यान माला समिति द्वारा स्वाधीनता सेनानी, पत्रकार एवं पूर्व राज्यसभा सदस्य स्वर्गीय कन्हैयालाल वैद्य की 118 वीं जयंती पर आयोजित व्याख्यान माला में तन, मन, धन और जगत् में जीवन विषय पर मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में उद्बोधन कर रहे थे। त्रिवेदी ने अपने उद्बोधन में आगे कहा कि हम यदि अपनी संकुचित सोच को छोड़ दें, किसी से वैमनस्य न रखें, ओर झगड़े की प्रवृत्ति को तिलांजलि दे दें, तो आत्मिक सुख को प्राप्त कर करते हुए, निर्भयता पूर्ण जीवन जी सकेंगे। अनिल त्रिवेदी ने महात्मा गांधी का स्मरण करते हुए कहा कि गांधीजी, समाजवादी नेता मामा बालेश्वर दयाल ओर कन्हैयालाल वैद्य ने समाज को निर्भय बनाने का कार्य किया था, किंतु हम इन महापुरुषों के मंत्र को आत्मसात नहीं कर पाए, शायद इसीलिए हम अपने जीवन में वास्तविक सुख की अनुभूति नहीं कर पाए। त्रिवेदी ने तन, मन और धन का व्यवहारिक विश्लेषण करते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय के लोग तन मन से हमारा आतिथ्य करते हैं, किंतु धन के व्यामोह में हम उनकी उपेक्षा करते रहे, परिणामस्वरूप हम उनके अनुभव और अपनत्व के धन से वंचित रह गए। उन्होंने मन की भूमिका और मनुष्य से अपनत्व का उदाहरण देते हुए कहा कि जनजातीय समुदाय के लोग पशु पक्षियों को भी परिवार का सदस्य मानते हैं, किंतु हम अपने परिवार को भी अपना नहीं मानते हैं, ऐसी स्थिति में हम परिवार जनों की ज्ञान और अनुभव के धन से वंचित हो जाते हैं, जो कि हमारी बहुत बड़ी क्षति है, क्यौंकि ऐसा करने पर हम अपने स्व से गिर जाते हैं, ओर जीवन के वास्तविक सुख से वंचित रह जाते हैं। त्रिवेदी ने कहा आज कि तन और मन के गौरव की जगह धन को महत्व दिया जा रहा है, जो पतन का कारण है। उन्होंने कहा कि हम जीवन को जीवन माने, ओर मन की शक्ति को पहचानें। उन्होंने जीवन की सारगर्भित व्याख्या करते हुए और नौकरी पेशा व्यक्ति की मानसिकता का उल्लेख करते हुए कहा कि आज हम अपनी जीविका अर्थात् नौकरी को ही अपना जीवन मान बैठे हैं, ओर जब जीविका छीन जाए, अर्थात नौकरी से रिटायरमेंट हो जाएं तो ऐसा मान लेते हैं कि जीवन में अब ओर कोई कर्तव्य शेष नहीं रहा, ओर अब अपना सब कुछ चला गया, ऐसा मान लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है। जीविका साध्य नहीं, बल्कि साधन मात्र है। नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद समाज के लिए जो हमारा दायित्व है, अपने अनुभव और ज्ञान के द्वारा हम उससे समाज की सेवा में तत्पर होवें, यह समाज के प्रति हमारा कर्तव्य भी है। अनिल त्रिवेदी ने जनजातीय समुदाय की पर्यावरण संरक्षण की सोच को रैखांकित करते हुए कहा कि हमारे द्वारा दैनंदिन जीवन में अपनी क्रियाओं के माध्यम से जल सहित पर्यावरण के अन्य उपादानों को दूषित किया जाता रहा हैं, किंतु जनजातीय समुदाय द्वारा दैनंदिनी क्रियाओं के माध्यम से पर्यावरण के उपादानों को संरक्षित एवं शुद्ध बनाए रखने का प्रयास किया जाता है। हमें चाहिए कि जनजातीय समुदाय से हम अपनी दैनिक क्रियाओं में पर्यावरण संरक्षण को प्रधानता देने का मूल मंत्र अंगीकार करें। व्याख्यान माला को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश भट्ट ने स्वर्गीय मामा बालेश्वर दयाल ओर कन्हैयालाल वैद्य का स्मरण करते हुए पत्रकारों से आव्हान किया कि वे इन महापुरुषों के आदर्शों को अंगीकार करते हुए स्वस्थ एवं जनाभिमुख पत्रकारिता के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों को दूर करने हेतु अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करें पूर्व विधायक कलसिंह भाबर ने समारोह को सम्बोधित करते हुए अपने उद्बोधन में स्वर्गीय मामा बालेश्वर दयाल ओर कन्हैयालाल वैद्य का स्मरण करते हुए कहा कि पहले पत्रकारिता विचार हुआ करते थे, किंतु अब पत्रकारिता व्यवसाय का रुप ले चुकी है। समारोह को श्री हनुमान अष्ट मंदिर न्यास मंडल के अध्यक्ष अशोक अरोड़ा, सामाजिक कार्यकर्ता नगीन शाह, भारतीय जनता पार्टी के नेता सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन नागदा के वरिष्ठ पत्रकार कैलाश सनोलिया ने किया। कार्यक्रम के आरंभ में अखिल भारतीय स्वाधीनता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के उज्जैन संभागीय संयोजक एवं संवाद एजेंसी यूएनआइ के उज्जैन स्थित पूर्व संवाददाता, लेखक एवं पत्रकार क्रांतिकुमार वैद्य ने कच्चे सूत की माला भेंट कर अतिथियों का स्वागत किया, जबकि राष्ट्रीय पत्रकार मोर्चा भारत के महानियंत्रक के सी यादव द्वारा अतिथियों एवं वरिष्ठ पत्रकारों को सम्मानित करते हुए स्मृति चिन्ह भेंट किए गए। अंंत में वैद्य विद्या निकेतन के वार्षिकोत्सव के पुरस्कार वितरित किए गए। ईएमएस/ डॉ. उमेश चन्द्र शर्मा/1/2/2026/